श्रीनगर , जुलाई 21 -- जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को नयी दिल्ली में नेकां द्वारा जम्मू-कश्मीर के लिए राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग वाले विरोध प्रदर्शन का बचाव किया। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य केंद्र को उसके वादे की याद दिलाना था।

राष्ट्रीय राजधानी में नेकां के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन के एक दिन बाद एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लिए राज्य का दर्जा बहाल किए बिना अनुच्छेद 370 को बहाल करने की दिशा में सार्थक रूप से आगे नहीं बढ़ा जा सकता।

उन्होंने जम्मू-कश्मीर के लिए राज्य के दर्जे की मांग को अनुच्छेद 370 के मुद्दे से नहीं जोड़ने का आग्रह करते हुए कहा कि ऐसी रणनीति से अभियान कमज़ोर पड़ सकता है।

श्री अब्दुल्ला ने कहा, "जिस दिन आप राज्य का दर्जा और अनुच्छेद 370 की मांग को एक ही विरोध-प्रदर्शन में मिला देंगे, उस दिन भाजपा के लोग आपको 370 नहीं देंगे। उन्हें राज्य का दर्जा न देने का बहाना मिल जाएगा।"मुख्यमंत्री ने कहा, "आप और मैं जानते हैं कि हमें इस भाजपा सरकार से अनुच्छेद 370 नहीं मिलेगा। मैंने हमेशा जम्मू-कश्मीर के लोगों से कहा है कि वे यह उम्मीद न रखें कि जिन लोगों ने अनुच्छेद 370 को हटाया है वे इसे हमें आसानी से वापस दे देंगे। यह बेवकूफी है।"उन्होंने कहा, "हमें जम्मू-कश्मीर के लिए विशेष दर्जा यानी अनुच्छेद 370 वापस लाना होगा लेकिन यह हमें इस सरकार में नहीं मिलेगा। कम से कम इस सरकार से हमें इसकी नींव तो मिलेगी ही। राज्य का दर्जा मिले बिना अनुच्छेद 370 का कोई मतलब नहीं है।"उन्होंने तर्क दिया कि जम्मू-कश्मीर के लिए विशेष दर्जा बहाल करने हेतु राज्य का दर्जा वापस मिलना संवैधानिक आधार हो सकता है। उन्होंने सोमवार के विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं होने के लिए जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक पार्टियों की आलोचना भी की। उन्होंने कहा, "हमने हर राजनीतिक पार्टी को बुलाया था क्योंकि यह सिर्फ़ नेशनल कांफ्रेंस का मुद्दा नहीं था बल्कि जम्मू-कश्मीर के लोगों से जुड़ा हुआ मुद्दा था। हमारे साथ जुड़ने के बजाय कुछ पार्टियों ने इस कार्यक्रम का मज़ाक उड़ाया और इसे नाकाम करने की कोशिश की।"उन्होंने आगे कहा, "वे हमसे पहले अनुच्छेद 370 और विशेष दर्जे की मांग करने के लिए कहते हैं लेकिन राज्य का दर्जा मिले बिना अनुच्छेद 370 का क्या मतलब है? केंद्र शासित प्रदेश में कोई राज्य सूची नहीं होती। सारी शक्तियां केंद्र के पास होती हैं। राज्य का दर्जा न होने पर, केंद्र और जम्मू-कश्मीर के बीच शक्तियों का कोई सार्थक बंटवारा नहीं हो सकता।"राज्य का दर्जा दिलाने के अभियान पर श्री अब्दुल्ला ने कहा कि दिल्ली में हुआ विरोध प्रदर्शन एक लंबे समय तक चलने वाले राजनीतिक आंदोलन की शुरुआत थी न कि उसका अंत। उन्होंने कहा कि अभियान के अगले चरण और उसकी रणनीति के बारे में पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला की देखरेख में संगठन स्तर पर फैसला किया जाएगा।

पार्टी के संकल्प को दोहराते हुए श्री अब्दुल्ला ने कहा कि राज्य का दर्जा पाने की मांग के लिए कोशिशों में कोई कमी नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि पार्टी केंद्र सरकार को जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने के उसके वादे की याद दिलाती रहेगी और आशा व्यक्त किया कि यह वादा देर-सवेर पूरा होगा।

दूसरी राजनीतिक पार्टियों की भागीदारी को लेकर हो रही आलोचना का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि नेकां संबंधित पक्षों को आमंत्रित तो कर सकती है लेकिन उन्हें शामिल होने के लिए मजबूर नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि नयी दिल्ली में एक साथ हो रहे राजनीतिक प्रदर्शनों एवं पाबंदियों के कारण रसद संबंधी दिक्कतों के बावजूद, कांग्रेस, सीपीआई और सीपीआईएम के नेताओं ने इस कार्यक्रम का समर्थन किया,जबकि कई अन्य विपक्षी दलों के प्रतिनिधि कार्यक्रम स्थल तक नहीं पहुंच पाए।

जम्मू-कश्मीर की पिछली विधानसभा में नेशनल कांफ्रेंस सरकार द्वारा पास किए गए स्वायत्तता प्रस्ताव का उल्लेख करते हुए श्री अब्दुल्ला ने कहा कि उसे अलगाववादी समूहों और केंद्र दोनों का विरोध झेलना पड़ा था। उन्होंने पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी का नाम लिए बिना उस पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि 2000 में स्वायत्तता प्रस्ताव के बाद लोगों की राजनीतिक आवाज़ को कमज़ोर करने के लिए ही इस पार्टी का गठन किया गया था। श्री अब्दुल्ला ने कहा, "उस समय की सरकार इस विधानसभा में पारित प्रस्ताव से नाराज़ थी। यहां के लोगों की आवाज़ को कमज़ोर करने और जनमत को बांटने के लिए उन्होंने 2000 में एक नई पार्टी बनाई।"उन्होंने आगे कहा "न तो आज़ादी की मांग करने वालों को आज़ादी मिली और न ही पाकिस्तान में शामिल होने की चाहत रखने वाले सफल हुए। 2000 में बनी पार्टी आज भी यहां के लोगों की आवाज़ को कमज़ोर करने की कोशिश कर रही है।" श्री अब्दुल्ला ने भाजपा नेता सुनील शर्मा की उन टिप्पणियों की भी आलोचना की जिनमें उन्होंने कहा था कि राज्य का दर्जा बहाल करने का समय सुरक्षा एजेंसियां तय करेंगी।

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