नयी दिल्ली , सितंबर 16 -- कन्नड़ सिनेमा में अपने उल्लेखनीय योगदान के लिये पहचाने जाने वाले अनंत नाग ने विभिन्न भारतीय भाषाओं की फिल्मों के अलावा रंगमंच, समानांतर सिनेमा और टेलीविजन में भी काम किया है।

पांच दशक से अधिक लंबे करियर में वह 300 से अधिक फिल्मों का हिस्सा रहे हैं, जिनमें 250 से अधिक कन्नड़ फिल्में शामिल हैं।

चार सितंबर 1948 को कर्नाटक के शिराली में जन्मे अनंत नागरकट्टे ने अभिनय की दुनिया में आने के बाद 'अनंत नाग' नाम से पहचान बनाई। उनका प्रमुख योगदान कन्नड़ सिनेमा में रहा है, लेकिन उन्होंने अपने अभिनय का दायरा एक भाषा तक सीमित नहीं रखा। कन्नड़ के साथ उन्होंने हिंदी, तेलुगु, तमिल, मराठी, मलयालम और अंग्रेजी भाषा की फिल्मों में भी अभिनय किया।

अनंत नाग की शुरुआती शिक्षा उडुपी के अज्जरकाड स्थित कैथोलिक स्कूल, दक्षिण कन्नड़ के आनंद आश्रम और तत्कालीन मैसूर राज्य के उत्तर कन्नड़ जिले स्थित चित्रापुर मठ में हुई। नौवीं कक्षा में उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए मुंबई भेज दिया गया।

अनंत नाग ने सेना में शामिल होने का भी प्रयास किया था, लेकिन कम वजन के कारण सेना और कमजोर नजर के कारण वायुसेना में उनका चयन नहीं हो सका।

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत मुंबई में कन्नड़ और कोंकणी नाटकों से की। इसके बाद उन्होंने सत्यदेव दुबे, गिरीश कर्नाड और अमोल पालेकर के नाटकों में काम किया। उन्होंने कोंकणी, कन्नड़ और मराठी भाषाओं के नाटकों में अभिनय किया और 22 वर्ष की उम्र तक रंगमंच से जुड़े रहे। रंगमंच के इसी अनुभव ने आगे चलकर उनके अभिनय करियर को मजबूत आधार दिया। थिएटर में काम करने के दौरान उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदारों को निभाने का अनुभव हासिल किया। यही अनुभव बाद में उनके फिल्मी अभिनय में भी दिखाई दिया। रंगमंच के बाद उन्होंने फिल्मों का रुख किया और वर्ष 1973 में कन्नड़ फिल्म 'संकल्प' से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की।

फिल्मों में शुरुआत के बाद अनंत नाग ने कन्नड़ सिनेमा में अपनी मजबूत पहचान बनाई। उन्होंने सामाजिक, पारिवारिक और गंभीर विषयों पर आधारित फिल्मों में अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं। उनकी अभिनय शैली में सहजता और स्वाभाविकता को प्रमुखता मिली। इसी कारण वह समानांतर सिनेमा से लेकर मुख्यधारा की फिल्मों तक अलग-अलग तरह की भूमिकाओं में नजर आते रहे।

समानांतर सिनेमा के दौर में भी अनंत नाग ने महत्वपूर्ण काम किया।

श्याम बेनेगल की फिल्म 'अंकुर' में उन्होंने अभिनय किया। इसके बाद उन्होंने 'निशांत', 'मंथन', 'भूमिका', 'कोंडुरा' और 'कलयुग' जैसी फिल्मों में भी काम किया। इन फिल्मों में सामाजिक और मानवीय विषयों को केंद्र में रखा गया था। अनंत नाग ने अपने अभिनय से इन कहानियों को प्रभावी बनाने में योगदान दिया। कन्नड़ सिनेमा में अनंत नाग की कई फिल्में उनके लंबे करियर का महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं। 'हमसगीत', 'बेयालु दारी', 'कन्नेश्वर रामा', 'नन्ना निन्ना बिडलारे' और 'चंदनदा गोम्बे' जैसी फिल्मों में उन्होंने विभिन्न भूमिकाएं निभायीं। समय के साथ कन्नड़ सिनेमा में आये बदलावों के बीच भी उन्होंने लगातार काम किया और अलग-अलग पीढ़ियों के फिल्मकारों के साथ जुड़े रहे।

बाद के दौर में भी अनंत नाग ने महत्वपूर्ण फिल्मों में अभिनय किया। 'गोधी बन्ना साधारणा मायकट्टू' जैसी फिल्म में उनकी भूमिका को सराहा गया।

अनंत नाग ने बड़े पर्दे पर अपनी छाप छोड़ने के बाद टेलीविजन के क्षेत्र में भी काम किया। आर. के. नारायण की कहानियों पर आधारित लोकप्रिय धारावाहिक 'मालगुडी डेज' में उनके अभिनय को बहुत सराहा गया। इस धारावाहिक का निर्देशन उनके भाई और अभिनेता-निर्देशक शंकर नाग ने किया था। टेलीविजन पर उनकी मौजूदगी ने उन्हें फिल्म दर्शकों के अलावा छोटे पर्दे के दर्शकों के बीच भी पहचान दिलायी।

अनंत नाग ने अपने करियर में केवल अभिनय तक ही खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने सार्वजनिक जीवन में भी सक्रिय भूमिका निभायी और राजनीति में प्रवेश किया। वह कर्नाटक विधान परिषद तथा विधानसभा के सदस्य रहे। इसके अलावा उन्होंने कर्नाटक सरकार में मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली। हालांकि उनका सबसे प्रमुख परिचय एक अभिनेता के रूप में ही रहा।

अभिनय के क्षेत्र में योगदान के लिये अनंत नाग को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उन्हें दक्षिण का फिल्मफेयर पुरस्कार छह बार मिला। इसके अलावा उन्हें कर्नाटक राज्य फिल्म पुरस्कार से भी पांच बार सम्मानित किया गया। उन्हें 2025 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके लंबे सार्वजनिक और कलात्मक योगदान की पहचान के रूप में दर्ज हुआ।

अनंत नाग का करियर भारतीय सिनेमा के कई महत्वपूर्ण बदलावों का साक्षी रहा है। जिस दौर में उन्होंने फिल्मों में कदम रखा, उस समय कन्नड़ सिनेमा में नये प्रयोग हो रहे थे। समानांतर सिनेमा के उभार से लेकर मुख्यधारा की लोकप्रिय फिल्मों और बाद के आधुनिक सिनेमा तक उन्होंने अलग-अलग दौर में काम किया।

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