श्रीनगर , जुलाई 23 -- जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में आतंकी हमले के दौरान पुलिस हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की हत्या के बाद सुरक्षा बलों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बीजबेहरा इलाके में दो स्थानीय लश्कर-ए-तैयबा आतंकियों के घरों को विस्फोटकों का इस्तेमाल कर कथित तौर पर उड़ा दिया।

इस घटना के बाद पूरी घाटी में सुरक्षा तंत्र को कड़ा कर दिया गया है और संदिग्ध नेटवर्क पर कार्रवाई करते हुए विभिन्न जिलों से करीब 2,000 ओवर ग्राउंड वर्करों (ओडब्ल्यूजी) को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है।

सुरक्षा बलों की इस कार्रवाई पर जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने घरों को गिराने और बड़े पैमाने पर की जा रही गिरफ्तारियों का विरोध करते हुए कहा कि ऐसी कार्रवाइयों से शांति बहाल नहीं होगी, बल्कि स्थिति और ज्यादा बिगड़ जाएगी।

श्री अब्दुल्ला ने कहा कि बिना कानूनी प्रक्रिया के घरों को ढहाना उच्चतम न्यायालय के स्पष्ट आदेशों का उल्लंघन है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जनता के सहयोग और समर्थन के बिना क्षेत्र से उग्रवाद को समाप्त नहीं किया जा सकता।

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि पुलिस अधिकारी की हत्या बेहद दर्दनाक और निंदनीय है, लेकिन इसके नाम पर हजारों लोगों को हिरासत में लेना और परिवारों के घर ढहाना 'सामूहिक सजा' जैसा है, जिसकी लोकतंत्र में कोई जगह नहीं है।

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