लखनऊ , अप्रैल 05 -- उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए प्रदेश के सभी माध्यमिक विद्यालयों में अनधिकृत पाठ्यपुस्तकों के प्रयोग पर सख्ती दिखाते हुए विशेष निर्देश जारी किए हैं। परिषद ने स्पष्ट किया है कि केवल अधिकृत प्रकाशकों की किताबें ही विद्यालयों में पढ़ाई जाएंगी, अन्यथा संबंधित संस्थाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
परिषद की सचिव भगवती सिंह द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि कई विद्यालयों में निजी प्रकाशकों की महंगी और अनधिकृत किताबें जबरन लागू कराई जा रही हैं, जो निर्धारित दरों से 149 से 361 प्रतिशत तक अधिक कीमत पर बेची जा रही हैं। इससे अभिभावकों और छात्रों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
इस समस्या को देखते हुए 15 अप्रैल तक प्रदेशभर में विशेष निरीक्षण अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। जिला विद्यालय निरीक्षकों और संबंधित अधिकारियों को नियमित निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि कहीं भी अनधिकृत किताबें न पढ़ाई जाएं। नियमों का उल्लंघन करने पर प्रबंधक, प्रधानाचार्य या शिक्षक के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
परिषद ने यह भी स्पष्ट किया कि पाठ्यपुस्तकों का कॉपीराइट परिषद के पास सुरक्षित है। ऐसे में पायरेसी या डुप्लीकेसी के मामलों में संबंधित व्यक्तियों और दुकानदारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए पुलिस और अन्य विभागों के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा।
इसके अलावा, सभी विद्यालयों में "पुस्तक जागरूकता एवं सुलभता शिविर (पुस्तक मेला)" आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि छात्रों को उचित दरों पर गुणवत्तापूर्ण और अधिकृत किताबें उपलब्ध कराई जा सकें।
परिषद ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे केवल वही पुस्तकें खरीदें, जिनके कवर पर 7 अंकों का विशेष सीरियल नंबर अंकित हो। बिना इस नंबर वाली किताबों को अनधिकृत माना जाएगा।
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