मिदनापुर , अक्टूबर 25 -- पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रविवार को राज्य की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की वकालत की।

उन्होंने पास-फेल व्यवस्था बहाल करने, स्कूलों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाने तथा भारतीय इतिहास, शारीरिक शिक्षा और पाठ्येतर गतिविधियों पर नए सिरे से जोर देने की बात कही।

श्री अधिकारी ने कहा कि सरकार औपचारिक निर्णय लेने से पहले पाठ्यक्रम समिति की सिफारिशों और राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर विचार करेगी। उन्होंने कहा, "व्यक्तिगत रूप से मेरा मानना है कि स्कूलों में मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए और पास-फेल व्यवस्था बहाल की जानी चाहिए। विद्यार्थियों को भारत और पश्चिम बंगाल का इतिहास भी पढ़ाया जाना चाहिए।"मुख्यमंत्री ने पूर्वी मिदनापुर के रामनगर में कल्पना जाना के घर का दौरा किया। कल्पना की कोलकाता के चोरबागान में भगदड़ की घटना में मौत हो गई थी। अधिकारी ने कहा कि संबंधित रिपोर्ट मिलने और शिक्षा विशेषज्ञों से विचार-विमर्श के बाद सरकार तथ्यों के आधार पर निर्णय लेगी।

उन्होंने राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी), राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) और व्रतचारी गतिविधियों को फिर से शुरू करने का प्रस्ताव रखा। उनका कहना था कि इन कार्यक्रमों से विद्यार्थियों में अनुशासन, शारीरिक फिटनेस और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना मजबूत हो सकती है।

उन्होंने स्कूल स्तर से ही संगीत शिक्षा शुरू करने की भी वकालत की। इसमें पारंपरिक भारतीय वाद्ययंत्रों की शिक्षा भी शामिल होगी। इसके साथ ही वाद-विवाद, प्रश्नोत्तरी और बिना तैयारी के भाषण जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित करने का सुझाव दिया।

श्री अधिकारी ने कहा कि प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य शिक्षा को कक्षा में पढ़ाई तक सीमित रखने के बजाय उसका दायरा बढ़ाना और विद्यार्थियों में सांस्कृतिक जागरूकता तथा राष्ट्रीय पहचान की भावना विकसित करना है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने शिक्षा मंत्री और विभागीय सचिव से कक्षा 11 के विद्यार्थियों को मोबाइल फोन खरीदने के लिए दी जाने वाली 10,000 रुपये की सहायता राशि के स्थान पर शैक्षणिक टैबलेट देने की संभावना पर विचार करने को कहा है।

उन्होंने कहा, "जरूरत पड़ने पर सरकार टैबलेट के लिए अधिक धनराशि दे सकती है, ताकि उनका इस्तेमाल शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए किया जा सके, न कि मोबाइल फोन खरीदने के लिए।"मुख्यमंत्री ने पारंपरिक शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को कमजोर करने के लिए पिछली सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि राज्य की पूरी शिक्षा व्यवस्था में राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की जाएगी। उन्होंने आगाह किया कि बदलाव रातोंरात नहीं किए जा सकते। सरकार पाठ्यक्रम समिति और अनुभवी शिक्षाविदों के साथ मिलकर काम करेगी। उन्होंने कहा, "अगले शैक्षणिक सत्र से कई बदलाव दिखाई देंगे।"इन प्रस्तावों से राज्य की स्कूली शिक्षा नीति में संभावित बदलाव के संकेत मिलते हैं। इनमें अनुशासन, सांस्कृतिक गतिविधियों और डिजिटल उपकरणों के इस्तेमाल को विशेष रूप से पढ़ाई तक सीमित रखने पर अधिक जोर दिया जा सकता है।

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