नयी दिल्ली , सितंबर 01 -- केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव चंचल कुमार ने मंगलवार को कहा कि आईआईएस अधिकारियों की भूमिका केवल संचार तक सीमित नहीं है, बल्कि वे शासन और नागरिकों की आकांक्षाओं के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं।
श्री कुमार ने आज यहां भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) में भारतीय सूचना सेवा (आईआईएस) के ग्रुप-ए अधिकारी प्रशिक्षुओं के 2009, 2023 और 2024 बैच के लिए विदाई एवं दीक्षांत समारोह में यह बात कही। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक संचार शासन व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा है और बदलती तकनीक तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ इसे लगातार विकसित करना होगा। उन्होंने उभरती तकनीकों के प्रति सजग रहने पर जोर देते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) एक गेमचेंजर साबित हो रही है, जबकि गलत सूचना, डीपफेक और सिंथेटिक कंटेंट नयी चुनौतियां पेश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि संचार एकतरफा प्रक्रिया नहीं होना चाहिए, बल्कि नागरिकों की प्रतिक्रिया के आधार पर नीतियों और उनके क्रियान्वयन में सुधार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संचार में तेजी महत्वपूर्ण है, लेकिन सटीकता और विश्वसनीयता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता, क्योंकि प्रत्येक आधिकारिक संदेश संस्थान की विश्वसनीयता और अधिकार को प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने अधिकारियों से लगातार अपने कौशल को उन्नत करने, जमीनी स्तर से जुड़े रहने और जरूरत पड़ने पर संचार के अलावा शासन के अन्य पहलुओं को समझने के लिए भी तैयार रहने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि अधिकारियों के कार्य के केंद्र में हमेशा नागरिक होने चाहिए और उन्हें यह लगातार विचार करना चाहिए कि उनके प्रयास आम लोगों, विशेष रूप से समाज के सबसे गरीब तबके के लिए कितने उपयोगी हैं। यदि उनके कार्य से लोगों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है तो उन्हें अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से नागरिकों की समस्याओं को संवेदनशीलता और करुणा के साथ समझने तथा उनके समाधान की दिशा में काम करने की अपील की।
आईआईएमसी की कुलपति डॉ. प्रज्ञा पालिवाल गौर ने कहा कि अधिकारी प्रशिक्षु इस स्नातकोत्तर डिग्री के पहले प्राप्तकर्ता हैं, जो आईआईएमसी की मजबूत होती अकादमिक भूमिका और संचार क्षेत्र में पेशेवर प्रशिक्षण के साथ उसके करीबी संबंध को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि संचार का उद्देश्य केवल सूचना का प्रसारण करना नहीं, बल्कि समझ विकसित करना है। उन्होंने अधिकारी प्रशिक्षुओं से अपने दायित्वों का निर्वहन स्पष्टता, वस्तुनिष्ठता और संवेदनशीलता के साथ करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एमए की डिग्री बदलते संचार क्षेत्र में निरंतर सीखते रहने के महत्व की भी याद दिलाती है।
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