भुवनेश्वर , जुलाई 21 -- उड़ीसा उच्च न्यायालय ने बालासोर कलेक्टर को एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर नोटिस जारी करते हुए चिंता जताई है कि व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए गांव के तालाब को भरने से पर्यावरण पर उसका व्यापक असर पड़ सकता है।

याचिका में एक बाजार बनाने के लिए गांव के तालाब को गैर-कानूनी तरीके से भरे जाने का आरोप लगाया गया है। अदालत ने कहा है कि राज्य को संवैधानिक रूप से जल निकायों के साथ छेड़छाड़ करने की अनुमति नहीं है।

मुख्य न्यायाधीश हरीश टंडन और न्यायमूर्ति केएस दीक्षित की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह मामला जल निकायों के संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन से जुड़े जनहित का एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाता है।

खंडपीठ ने कहा, "इस जनहित याचिका में मुख्य मुद्दा यह है कि क्या राज्य या उसकी एजेंसियां वहां बाजार बनाने के लिए जल निकायों को भर सकती हैं। ऐसा कदम न केवल पारिस्थितिक तंत्र में असंतुलन पैदा करता है बल्कि देशभर में जल निकायों को भरने से रोकने के लिए कानून भी मौजूद हैं। इसलिए यह न केवल एक कानूनी दायित्व है बल्कि एक संवैधानिक आदेश भी है कि राज्य जल निकायों के साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकता।"अदालत ने जनहित का मामला मानते हुए सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई के लिए तय की।

गौरतलब है कि यह याचिका बालासोर जिले के बालियापाल प्रखंड के अंतर्गत मधुपुरा ग्राम पंचायत की ओर से दायर की गई है, जिसमें पंचायत के तालाब को बाजार क्षेत्र में तब्दील करने के प्रयास को चुनौती दी गई है।

याचिका के अनुसार मधुपुरा ग्राम पंचायत के सरपंच ने मौजा बडासिमुलिया में पंचायत तालाब को आंशिक रूप से भर दिया और छोटे व्यापारियों से दुकान की जगह देने के वादे पर बड़ी रकम वसूलने के बाद वहां अस्थायी लकड़ी की दुकानें लगानी शुरू कर दीं। याचिकाकर्ता का आरोप है कि यह काम तहसील अधिकारियों से अनुमति लिए बिना किया गया।

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