मुंबई , अगस्त 29 -- बॉम्बे हाई कोर्ट ने शनिवार को महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया कि वह उन आदिवासी छात्रों की तत्काल मेडिकल सुविधा सुनिश्चित करे जो आश्रम स्कूलों की बदतर स्थितियों को लेकर पिछले 15 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं।

यह निर्देश कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति गौतम ए. अंखाड की खंडपीठ ने दिया। गौरतलब है कि यह पीठ पुणे के मंजिरी के रहने वाले अशोक कवाडू मेश्राम की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें सरकारी आदिवासी छात्रावासों में खराब बुनियादी सुविधाओं, सुरक्षा चिंताओं और लंबित शिकायतों को लेकर न्यायिक दखल की मांग की गई थी।

याचिकाकर्ता ने बताया कि मंजिरी के सरकारी आदिवासी छात्रावास में छह छात्र-छात्राएं 14 मांगों को लेकर 13 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं और लगभग 800 छात्र धरने पर बैठे हैं। उनकी सेहत बिगड़ गई है, ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर का स्तर गिर रहा है। एक छात्र को चार बार अस्पताल में भर्ती कराया जा चुका है।

उन्होंने चेतावनी दी कि स्थिति बहुत गंभीर है और इससे पूरे राज्य में ऐसे ही विरोध-प्रदर्शन शुरू हो सकते हैं। उन्होंने हाल की घटनाओं का हवाला दिया, जिनमें अमरावती के एक आश्रम स्कूल में छात्र की मौत और खाद्य विषाक्तता, ठाणे के शहापुर में दूषित चीजों से 22 नाबालिगों का बीमार पड़ना और गढ़चिरौली के जप्तलाई में सांप के काटने से तीन लड़कियों की मौत शामिल है।

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