कोलकाता , अगस्त 20 -- कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के फरार पत्थर व बालू कारोबारी मोहम्मद नजीबुद्दीन मंडल उर्फ तुलु मंडल की गिरफ्तारी व दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा की याचिका खारिज कर दी।

न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ ने गिरफ्तारी से सुरक्षा की मांग करने वाली मंडल की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि जांच जारी रहनी चाहिए और इस चरण में अदालत को जांच एजेंसी के काम में दखल नहीं देना चाहिए। अदालत ने माना कि यह मामला प्रथम दृष्टया संगठित अपराध से जुड़ा है।

न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने उच्चतम न्यायालय के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा, "तुलु मंडल इंद्रजीत हैं। रामायण की कथा की तरह वह बादलों के पीछे से सब कुछ देख रहे हैं।" गौरतलब है कि अदालत मंडल की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा है जो उन्होंने तब दायर की थी जब पुलिस ने बीरभूम के मोहम्मदबाजार थाना के तहत देउचा गांव में उनके रिश्तेदार मिनार मंडल के घर से 28.5 करोड़ रुपये नकद और 15 किलो सोना बरामद किया था। मिनार को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि पुलिस तुलु का पता नहीं लगा पाई है।

मंडल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने तर्क दिया कि घर पर नकदी और सोना रखना भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत अपराध नहीं है और बिना हिसाब-किताब वाली संपत्ति से जुड़े किसी भी मामले को आयकर अधिनियम के तहत निपटाया जा सकता है। अदालत ने हालांकि कहा कि बरामद नकदी की मात्रा 'छोटी-मोटी् नहीं बल्कि 'बहुत बड़ी' थी।

श्री दवे ने नकदी और सोने की बरामदगी के सिलसिले में संगठित अपराध से जुड़ी धाराओं को लागू करने पर भी सवाल उठाए। न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा कि अगर मामले में लगाई गई धाराओं पर कोई आपत्ति है, तो मंडल संबंधित मजिस्ट्रेट के पास जा सकते हैं। राज्य ने गुरुवार को अदालत के सामने एक गोपनीय रिपोर्ट पेश की। अतिरिक्त महाधिवक्ता बिलवदल भट्टाचार्य ने अनुरोध किया कि इसकी जानकारी कहीं और उजागर न की जाए। आदेश पारित करने से पहले न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने रिपोर्ट देखी।

पुलिस पहले ही मंडल से जुड़ी संपत्तियों को जब्त कर चुकी है। उन्होंने शुरू में गिरफ्तारी से सुरक्षा की मांग करते हुए न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की पीठ का रुख किया था। उन्होंने बाद में गिरफ्तारी वारंट को चुनौती देते हुए और अपनी संपत्तियों की जब्ती में अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए न्यायमूर्ति कौशिक चंदा की अदालत का रुख किया। न्यायमूर्ति चंदा ने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया क्योंकि मंडल से जुड़ा एक मामला पहले से ही दूसरी पीठ के सामने लंबित था।

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