चेन्नई , अगस्त 25 -- मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने पलानी मंदिर मठ की लगभग 100 करोड़ रुपये की जमीन के अवैध पंजीकरण मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की मांग से संबंधित याचिकाएं खारिज कर दी हैं।

संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान तमिलनाडु पुलिस की अपराध शाखा-आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) ने मामले की जांच की प्रगति पर एक स्थिति रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में छह जिलों में की गई तलाशी और 207 दस्तावेजों, मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड डिस्क सहित इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, ऑडियो रिकॉर्ड और नकद राशि जब्त किए जाने का जिक्र किया गया।

अपराध शाखा-सीआईडी ने यह भी बताया कि अब तक 115 गवाहों से पूछताछ की जा चुकी है और वे रजिस्ट्रेशन और राजस्व विभागों से मिले रिकॉर्ड, बैंकिंग रिकॉर्ड, मोबाइल कॉल और इंटरनेट प्रोटोकॉल डिटेल रिकॉर्ड (आईपीआरडी), सीसीटीवी फुटेज और संपत्ति, उसके प्रशासन व अन्य रिकॉर्ड से जुड़े दस्तावेजों का विश्लेषण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जांच अभी चल रही है और इन सभी दस्तावेजों का विश्लेषण किया जाना बाकी है। सुनवाई के दौरान सरकार ने कहा कि सीबी-सीआईडी की जांच सही दिशा में आगे बढ़ रही है और मामले को सीबीआई को सौंपने की कोई जरूरत नहीं है।

न्यायमूर्ति सीवी कार्तिकेयन और न्यायमूर्ति आर शक्तिवेल की पीठ ने स्थिति रिपोर्ट पर गौर करने और सरकार की दलीलों को स्वीकार करने के बाद कोई राय देने से इनकार कर दिया क्योंकि जांच अभी चल रही है। पीठ ने अन्नाद्रमुक के पूर्व पलानी विधायक वेणुगोपाल सेनापति (जो मंदिर के पूर्व ट्रस्टी भी हैं), पलानी नगर परिषद की अध्यक्ष उमा महेश्वरी और मंदिर की ट्रस्टी अन्नपूर्णी द्वारा मामले को सीबीआई को सौंपने के लिए दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया।

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