चेन्नई , सितंबर 26 -- मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री मुरुदुर गोपालन रामचंद्रन (एमजीआर) की पत्नी जानकी रामचंद्रन के बेटे जे. सुरेंद्रन की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने तिरुचिरापल्ली (त्रिची) में एमजीआर की संपत्ति पर मालिकाना हक मांगा था।

इस याचिका में त्रिची में मौजूद दिवंगत एमजीआर की अचल संपत्ति के मालिकाना हक और प्रशासन के अधिकार-पत्र की मांग की गई थी। न्यायमूर्ति एडी मारिया क्लीट ने आदेश पारित करते हुए कानूनी उत्तराधिकार साबित न कर पाने के आधार पर आवेदन को खारिज कर दिया और कहा कि प्रशासन का अधिकार-पत्र के लिए दायर याचिका के जरिए संपत्ति के मालिकाना हक से जुड़े जटिल विवादों का निपटारा नहीं किया जा सकता।

याचिकाकर्ता ने सक्षम स्थानीय प्राधिकरण से संपत्ति कर निर्धारण, राजस्व रिकॉर्ड, पट्टा, नगर निगम रिकॉर्ड या कोई अन्य ऐसा दस्तावेज़ पेश नहीं किया, जिससे यह पता चल सके कि संपत्ति अभी किसके नाम पर है या इस बीच किसने उस पर कब्ज़ा किया और उसका इस्तेमाल किया। अभी उस संपत्ति पर कौन रह रहा है या किसके कब्ज़े में है, इसकी जानकारी भी नहीं दी गई है।

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता एमजीआर से लेकर सुश्री जानकी रामचंद्रन तक त्रिची वाली उस खास संपत्ति के कानूनी उत्तराधिकार की निरंतर कड़ी साबित करने में नाकाम रहे। न्यायाधीश ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता ने मद्रास उच्च न्यायालय के 2012 के एक मशहूर फैसले का फायदा उठाने की कोशिश की, जिसमें जे. सुरेंद्रन को एमजीआर की आत्मकथा 'नान येन पिरान्थेन' के कॉपीराइट का एकमात्र मालिक घोषित किया गया था।

न्यायमूर्ति मारिया क्लीट ने हालांकि स्पष्ट किया कि बौद्धिक संपदा पर आए पिछले फैसले से इस अलग अचल संपत्ति के उत्तराधिकार का फैसला या पुष्टि अपने-आप नहीं हो जाती, खासकर इसलिए क्योंकि मौजूदा प्रतिवादी उस पुराने मुकदमे का हिस्सा नहीं थे। इसके अलावा प्रशासन के अधिकार पत्र की कार्यवाही का मकसद जमीन के मालिकाना हक से जुड़े जटिल विवादों का पक्का फैसला करना नहीं होता है।

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