अंबाला/अमृतसर , अगस्त 08 -- शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने शनिवार को शाहाबाद मारकंडा स्थित मीरी-पीरी मेडिकल इंस्टीट्यूट का दौरा किया।

उन्होंने ट्रस्ट सदस्यों, अस्पताल के स्टाफ और क्षेत्र के लोगों को भरोसा दिलाया कि अस्पताल से संबंधित अदालत के मामले में अंतिम फैसला आने तक एसजीपीसी अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हटेगी। स्टाफ के वेतन और मरीजों को उपलब्ध करायी जा रही सभी चिकित्सा सुविधाओं को निर्बाध जारी रखा जाएगा।

एडवोकेट धामी ने कहा कि मीरी-पीरी मेडिकल इंस्टीट्यूट के संचालन के लिए एसजीपीसी की ओर से अलग ट्रस्ट गठित किया गया है, जिसकी अध्यक्षता एसजीपीसी अध्यक्ष करते हैं। वर्ष 2006 से अस्तित्व में आया यह अस्पताल हरियाणा और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करा रहा है। अस्पताल की ओपीडी के अलावा कैथ लैब, घुटनों तथा अन्य चिकित्सा सेवाओं का बड़ी संख्या में लोग लाभ उठा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि करीब तीन वर्ष पहले शुरू की गयी कैथ लैब भी सफलतापूर्वक चल रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एसजीपीसी से संबंधित अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों में जाति, धर्म या किसी अन्य आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता। हर व्यक्ति को उसकी आवश्यकता के अनुसार चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना और 'सरबत के भले' की भावना से सेवा करना संस्थाओं का मूल उद्देश्य है।

उन्होंने बताया कि एसजीपीसी अब तक मीरी-पीरी मेडिकल इंस्टीट्यूट को लगभग 142 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दे चुकी है। इसके अलावा हर वर्ष बजट में लगभग आठ करोड़ रुपये का प्रावधान रखा जाता है। पूर्व में श्री हरिमंदिर साहिब से भी इस संस्थान को लगभग 25 करोड़ रुपये की राशि दी गयी है।

उन्होंने कहा कि एसजीपीसी का उद्देश्य भविष्य में अस्पताल को मेडिकल कॉलेज के रूप में विकसित करना भी है और इसके लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार किया गया है।

अदालती मामले पर उन्होंने कहा कि एसजीपीसी ने हमेशा न्यायालयों के फैसलों का सम्मान किया है और इस मामले में भी कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि 12 मई के फैसले के बाद एसजीपीसी ने अपने कानूनी अधिकार के तहत एलपीए दायर की थी, जिस पर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने सुनवाई करते हुए नए मेडिकल बोर्ड से संबंधित कार्रवाई पर रोक लगा दी है। उन्होंने कहा कि मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है।

एडवोकेट धामी ने कहा कि यह मामला किसी तरह के कब्जे का नहीं, बल्कि लोगों को चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने और संस्थान की जिम्मेदारियां निभाने का है। उन्होंने बताया कि अस्पताल के स्टाफ के वेतन के लिए एसजीपीसी की ओर से 1.40 करोड़ रुपये जारी किये जा चुके हैं और बाकी लंबित वेतन भी जारी किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पिछले समय में कुछ डॉक्टर और अन्य स्टाफ सदस्य अस्पताल छोड़कर चले गये थे। उनसे संपर्क किया जा रहा है और उन्हें वापस लौटने की अपील की जा रही है। एसजीपीसी अध्यक्ष ने कहा कि अदालत का अंतिम फैसला आने तक कमेटी अपनी पहले वाली सभी जिम्मेदारियां पूरी तरह निभाती रहेगी। उनका प्रयास है कि अस्पताल का प्रशासन सुचारू रूप से चले, स्टाफ को समय पर वेतन मिले और हरियाणा के लोगों को पहले की तरह चिकित्सा सुविधाएं मिलती रहें। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका अस्पताल दौरा किसी प्रकार के कब्जे के लिए नहीं था, बल्कि अस्पताल के स्टाफ, मरीजों और हरियाणा के लोगों को यह भरोसा दिलाने के लिए था कि अदालत के अंतिम फैसले तक चिकित्सा सेवाओं और कर्मचारियों के अधिकारों में किसी प्रकार की बाधा नहीं आने दी जाएगी।

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