नैनीताल , मार्च 24 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने अल्मोड़ा विश्वविद्यालय के विधि संकाय में अतिथि शिक्षक के मामले में सख्त रुख अख्तियार करते हुए विश्वविद्यालय से जवाब-तलब किया है।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में हुई सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय के अधिवक्ता ने आवश्यक निर्देश प्राप्त करने के लिए दो दिन का समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

मामला विधि संकाय की अतिथि शिक्षक प्रियंका की पुनर्नियुक्ति से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने अपनी पुनर्नियुक्ति न होने और उनके खिलाफ की गई कार्रवाई को अदालत में चुनौती दी है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने प्राथमिक रूप से माना कि विभागाध्यक्ष द्वारा पुनः नियुक्ति से इनकार करना न केवल भेदभावपूर्ण है, बल्कि दुर्भावनापूर्ण और प्रतिशोधात्मक भी प्रतीत होता है।

याचिकाकर्ता के अनुसार, वह विभागाध्यक्ष के खिलाफ आंतरिक शिकायत समिति के समक्ष गवाह थीं और समिति ने विभागाध्यक्ष के खिलाफ प्रतिकूल रिपोर्ट भी दी थी लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

अदालत ने यह भी नोटिस किया कि पूर्व में पारित आदेशों के बावजूद विभागाध्यक्ष द्वारा याचिकाकर्ता को कार्यभार ग्रहण नहीं करने दिया गया और बाद में अनुपस्थिति का हवाला देकर उनका पारिश्रमिक भी रोक दिया गया।

विश्वविद्यालय के अधिवक्ता ने अदालत को आश्वस्त किया कि पूर्व में पारित आदेशों का पालन किया जाएगा और विभागाध्यक्ष के खिलाफ चल रही जांच की स्थिति स्पष्ट की जाएगी।

अब इस मामले में एक अप्रैल को अगली सुनवाई होगी, जिसमें विश्वविद्यालय प्रशासन को अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा।

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