तिरुवनंतपुरम , जुलाई 01 -- केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने विधानसभा में स्पष्ट किया है कि अडानी समूह राज्य सरकार की पूर्व अनुमति के बिना 'विझिंजम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह परियोजना' में अपनी 49 प्रतिशत हिस्सेदारी किसी को हस्तांतरित नहीं कर सकता।

श्री सतीशन ने स्पष्ट किया कि बिना सरकारी सहमति के किये गये ऐसे किसी भी सौदे की कोई कानूनी वैधता नहीं होगी, क्योंकि रियायत समझौते के तहत शेयरहोल्डिंग में बदलाव के लिए राज्य की मंजूरी अनिवार्य है और वर्ष 2080 में इस बंदरगाह का पूरा मालिकाना हक वापस केरल सरकार के पास ही आना है।

यह स्पष्टीकरण उन रिपोर्टों के बीच आया है, जिसमें अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (अडानी पोर्ट्स) की वैश्विक शिपिंग दिग्गज 'मेडिटेरेनियन शिपिंग कंपनी' (एमएससी) के साथ 49 फीसदी हिस्सेदारी हस्तांतरित करने की सहमति बनने की बात कही जा रही है। टर्मिनल इन्वेस्टमेंट लिमिटेड (टीआईएल) की सहायक कंपनी 'मुंडी लिमिटेड' के जरिये होने वाले इस संभावित सौदे से केरल में करीब 13,000 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री ने हालांकि कहा है कि आधिकारिक आवेदन मिलने के बाद ही सरकार इस पर विचार करेगी, वहीं अडानी समूह ने भी जल्द ही औपचारिक पत्र सौंपने की बात कही है।

मुख्यमंत्री ने सदन को भरोसा दिया कि विझिंजम बंदरगाह शहर परियोजना और राज्य बजट की 'विजन समुद्र' पहल केरल के विकास को रफ्तार देगी, जिसके साथ ही उत्तरी केरल के अजीक्कल और बेपोर बंदरगाहों के आधुनिकीकरण को भी प्राथमिकता दी जायेगी। वर्तमान में विझिंजम पोर्ट के दूसरे चरण का विकास कार्य जारी है, जिससे इसकी मौजूदा 10.6 लाख टीईयू क्षमता दिसंबर 2028 तक बढ़ाकर 50.7 लाख टीईयू करने का लक्ष्य रखा गया है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित