बेंगलुरु , अक्टूबर 14 -- अडाणी ग्रीन एनर्जी (यूपी) लिमिटेड ने सोलर पावर प्लांट पर संपत्ति के कुल मूल्य का एक प्रतिशत संपत्ति कर लगाने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए कर्नाटक उच्च न्यायालय का रुख किया है।
कंपनी ने पिछले साल 17 अक्टूबर को अधिसूचित 'कर्नाटक ग्राम स्वराज और पंचायत राज (ग्राम पंचायत कर, दरें और शुल्क) नियम, 2025' को चुनौती दी है। इसके साथ ही, उसने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ग्राम पंचायत अधिकारियों द्वारा जारी कर की मांग करने वाले जारी नोटिस और मूल्यांकन कार्यवाही को रद्द करने की मांग की है।
कंपनी ने अपनी याचिका में तर्क दिया है कि सोलर पावर प्लांट पारंपरिक उद्योगों से अलग हैं और उन पर उसी तरह कर नहीं लगाया जाना चाहिए।
सरकार ने इससे पहले सोलर पावर प्लांट सहित नवीकरणीय ऊर्जा इकाइयों के लिए 5,000 रुपये प्रति मेगावाट का वार्षिक कर तय किया था। कंपनी ने कहा कि वह फरवरी 2018 और मार्च 2020 में जारी सरकारी परिपत्रों के आधार पर इस व्यवस्था के तहत कर का भुगतान करती आ रही थी।
कंपनी का बेंगलुरु दक्षिण जिले के चन्नापटना और मागड़ी तालुक के एमबी हल्ली, एच ब्यादराहल्ली और मट्टीकेरे ग्राम पंचायतों के अधिकार क्षेत्र में एक सोलर पावर प्लांट है।
याचिका के अनुसार, सरकार ने बाद में वार्षिक कर को बढ़ाकर 10,000 रुपये प्रति मेगावाट करने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, अक्टूबर 2025 में पेश किए गए अंतिम नियमों में सोलर पावर प्लांटों को नियमित औद्योगिक भवनों के रूप में वर्गीकृत कर दिया गया और संपत्ति के मूल्य का एक प्रतिशत संपत्ति कर लगा दिया गया।
कंपनी ने आरोप लगाया है कि सरकार ने बिना कारण बताए या नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के हितधारकों से परामर्श किए बिना यह बदलाव किया है।
उसने तर्क दिया है कि सोलर पावर प्लांट पारंपरिक उद्योगों की तरह काम नहीं करते हैं और बिजली उत्पादन क्षमता के बजाय संपत्ति के मूल्य के आधार पर कर की गणना करने से नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं पर वित्तीय बोझ काफी बढ़ जाएगा।
कंपनी ने यह भी दावा किया है कि नए नियम भेदभावपूर्ण हैं क्योंकि औद्योगिक भवनों की कुछ अन्य श्रेणियों पर संपत्ति कर की दरें कम हैं।
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