सोनीपत , जुलाई 15 -- हरियाणा के सोनीपत जिले के तिहाड़ कलां गांव में पशुओं के प्रति प्रेम और आस्था की अनूठी मिसाल देखने को मिली। यहां एक परिवार ने 18 वर्षों तक अपने परिवार का हिस्सा रही प्रिय गाय 'नंदिनी' के निधन के बाद वैदिक रीति-रिवाजों के साथ उसकी तेहरवीं का आयोजन किया। कार्यक्रम में 11 आसपास के गांवों के लोगों ने भाग लेकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
तेहरवीं के अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन, गौ पूजा, शोक सभा और सामुदायिक भोज का आयोजन किया गया। नंदिनी की तस्वीर पर पुष्प अर्पित किये गये। भोज में पूरी, आलू और कद्दू की सब्जी के साथ छह क्विंटल रसगुल्ले प्रसाद के रूप में परोसे गए। परंपरा के अनुसार सभी लोगों को जमीन पर बैठाकर भोजन कराया गया।
परिवार के सदस्य मनजीत तिहाड़ ने बताया कि नंदिनी 18 वर्षों से परिवार का अभिन्न हिस्सा थी और उसे रसगुल्ले बेहद पसंद थे। उसकी स्मृति में विशेष रूप से रसगुल्ले बनवाये गये। कार्यक्रम की शुरुआत 11 पुरोहितों द्वारा वैदिक हवन से हुई। इसके बाद गौ आरती और सामुदायिक भोज आयोजित किया गया। परंपरा के अनुसार पहले 21 ब्राह्मणों को भोजन कराया गया।
परिजनों के अनुसार नंदिनी तीन महीने की बछिया के रूप में घर आयी थी। मां की मृत्यु के बाद परिवार ने उसे पुत्री की तरह पाला। अपने जीवनकाल में उसने 12 बछड़ों को जन्म दिया, जिनमें से छह की देखभाल आज भी परिवार कर रहा है।
करीब साढ़े तीन महीने तक इलाज चलने के बावजूद नंदिनी को बचाया नहीं जा सका। परिवार ने वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार उसका अंतिम संस्कार किया और श्रद्धांजलि स्वरूप 31 किलोग्राम नमक अर्पित कर उसे सम्मानपूर्वक विदाई दी।
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