मुंबई , जुलाई 14 -- राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) को पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की एक विमान दुर्घटना में मौत के बाद पार्टी को स्थिरता के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

राकांपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल पार्टी में चल रही उथल-पुथल को स्वीकार करते हुए सोमवार को सार्वजनिक रूप से माना कि पार्टी नेतृत्व की कमी को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रही है। उन्होंने कहा, "अजीत पवार की मौत के बाद बनी खाली जगह को भरना मुश्किल है। पार्टी को सुधारात्मक कदम उठाने की जरूरत है।"पार्टी का संकट ऐसे समय में उभरकर सामने आया है जब राकांपा की मौजूदा नेता उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और उनके बेटे राज्यसभा सांसद पार्थ पवार के अधिकार को लेकर एक कानूनी चुनौती पेश की गई है। पूर्व राष्ट्रीय सचिव सच्चिदानंद सिंह ने सात पृष्ठों का कानूनी नोटिस जारी करते हुए पार्टी के संवैधानिक नियमों का पालन न करने का हवाला देते हुए श्रीमती सुनेत्रा पवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर चुनाव को 'गैर-कानूनी' और 'अमान्य' करार दिया है।

इस अशांति की जड़ में वरिष्ठ नेताओं की यह सोच है कि नयी कमान के तहत पार्टी का दायरा सिमटता जा रहा है और सारी ताकत कुछ ही लोगों के हाथों में केंद्रित हो गई है। वरिष्ठ पदाधिकारी बातचीत की कमी और अहम विभागों, खासकर वित्त मंत्रालय को हासिल नहीं कर पाने से निराश हैं।

कानूनी नोटिस में पार्टी से एक स्वतंत्र चुनाव प्राधिकरण बनाने और नये सिरे से संगठनात्मक चुनाव कराने के लिए 15 दिन का समय मांगा गया है। ऐसे में राकांपा के सामने अब एक अहम अल्टीमेटम है, जो महायुति गठबंधन में पार्टी के भविष्य को तय कर सकता है।

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