हमीरपुर (हिमाचल प्रदेश) , मार्च 25 -- केंद्र सरकार ने अग्निवीरों के लिए रोजगार के अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सभी राज्यों से सरकारी नौकरियों में 20 प्रतिशत आरक्षण देने की सिफारिश की है। इस संबंध् में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखा है।
यह पहल उस समय की गई है जब अग्निवीरों का पहला बैच वर्ष 2027 में अपनी चार वर्षीय सेवा पूरी करेगा। केंद्र सरकार चाहती है कि सेवा समाप्ति के बाद इन युवाओं को पर्याप्त रोजगार अवसर मिल सकें।
गृह मंत्रालय द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि पूर्व सैनिकों की तर्ज पर अग्निवीरों को भी राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में अवसर दिए जाएं। इससे 2027 में सेवा पूरी करने वाले पहले बैच को रोजगार के बेहतर विकल्प मिल सकेंगे।
पत्र में विशेष रूप से वन रक्षक, खनन गार्ड, पुलिस कांस्टेबल, फायरमैन, माउंटेड पुलिस, जेल वार्डन, विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) जैसे पदों में 20 प्रतिशत आरक्षण देने की सिफारिश की गई है। इस कदम का उद्देश्य अनुशासित और प्रशिक्षित अग्निवीरों की सेवाओं का उपयोग राज्यों में कानून-व्यवस्था और आपदा प्रबंधन को मजबूत करने में करना है। देश के कई राज्यों ने इस दिशा में पहल भी शुरू कर दी है। हरियाणा इस तरह का आरक्षण लागू करने वाला पहला राज्य बन गया है, जहां पुलिस, खनन गार्ड, जेल वार्डन, विशेष पुलिस अधिकारी और ग्रुप-सी पदों में अग्निवीरों के लिए प्रावधान किया गया है।
वहीं उत्तराखंड ने भी पुलिस और अन्य वर्दीधारी सेवाओं में आरक्षण की घोषणा की है। हिमाचल प्रदेश, जिसे वीरों की भूमि कहा जाता है, में बड़ी संख्या में युवा तीनों सेनाओं में अग्निवीर के रूप में सेवा दे रहे हैं। ऐसे में 2027 में पहले बैच की वापसी के बाद उनके रोजगार के अवसर राज्य सरकार के निर्णय पर निर्भर करेंगे।
इस संबंध में हिमाचल प्रदेश के सैनिक कल्याण विभाग ने भी राज्य सरकार को विस्तृत रिपोर्ट भेजी है। विभाग के निदेशक ब्रिगेडियर मदनशील शर्मा (सेवानिवृत्त) ने बताया कि गृह मंत्रालय से पत्र प्राप्त हुआ है, जिसमें 2027 में सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों के लिए विभिन्न राज्य विभागों में 20 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की सिफारिश की गई है।
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