नयी दिल्ली , सितंबर 25 -- सरकार ने चेन्नई की कंपनी अग्निकुल कॉसमॉस प्रा लि को स्वदेशी और पुन: उपयोग योग्य अंतरिक्ष परिवहन की नयी प्रणालियों पर अनुसंधान एवं विकास कार्य में मदद के लिए 200 करोड़ रुपये की सहायता देने का समझौता किया है।
कंपनी को यह सहयाता विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) द्वारा अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) कोष के अंतर्गत दी जा रही है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य पुन: उपयोग योग्य प्रक्षेपण यान - अग्निबान आरएलवी - का विकास करना है। वित्तीय सहायता वैकल्पिक परिवर्तनीय डिबेंचर (ओसीडी) के माध्यम से प्रदान की जायेगी।
यह परियोजना प्रक्षेपण यान के केवल पहले चरण को पुनर्प्राप्त करने के पारंपरिक दृष्टिकोण से आगे बढ़कर पूर्ण प्रणाली के पुन: उपयोग की दिशा में काम करने के उद्येश्य से शुरू की जा रही है। इससे प्रक्षेपण और विनिर्माण लागत में कमी आयेगी। इस परियोजना के तहत राकेट में एक हल्के ऊपरी चरण, उपग्रहों को उनकी कक्षा में पहुंचाने की सटीक क्षमता और ईधन के प्रवाह के वाल्व और उसे पुनः चालू करने की क्षमता विकसित के की कल्पना की गयी है। इसमें अर्ध-क्रायोजेनिक तरल प्रणोदन प्रणाली शामिल होगी।
अग्निकुल ने अपने विकास और परीक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से इस तकनीक के कई पहलुओं का प्रदर्शन पहले ही कर लिया है। कंपनी के पूर्व कार्यों में स्वदेशी कक्षीय श्रेणी के प्रक्षेपण यान अग्निबान का विकास और कंपनी द्वारा विकसित और निर्मित एकल-भाग 3डी-प्रिंटेड रॉकेट इंजन अग्निलेट इंजन शामिल हैं। प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने इससे पहले छोटे उपग्रह मिशनों के लिए मॉड्यूलर संयोजन करने योग्य प्रक्षेपण यान के विकास और व्यावसायीकरण में अग्निकुल का समर्थन किया था।
प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा कि भारत की अंतरिक्ष यात्रा के अगले चरण में ऐसी तकनीकों की आवश्यकता होगी जो न केवल कक्षा तक पहुंच सकें, बल्कि अधिक बार, मजबूती और दक्षता के साथ ऐसा कर सकें। इस संदर्भ में पुन: प्रयोज्यता एक महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्र है। अनुसंधान, विकास और नवाचार कोष के माध्यम से, प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड महत्वाकांक्षी स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के विकास में सहयोग कर रहा है, जिन्हें उन्नत प्रौद्योगिकी चरणों से तैनाती की ओर बढ़ने के लिए निरंतर निवेश की आवश्यकता है।
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