नयी दिल्ली , अगस्त 15 -- देश के श्रम बाजार की स्थिति पर सरकार के एक आवर्ती सर्वेक्षण के मुताबिक आबादी में 15 साल और उससे ज़्यादा उम्र के लोगों के रोजी-रोजगार में लगे होने की दर (एलएफपीआर) इस वर्ष जुलाई माह के 55.4 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त, में 55.6 प्रतिशत हो गयी।
ताजा आंकड़ों के अनुसार अगस्त में कुल मिला कर बेरोजगारी दर पांच प्रतिशत थी।
सांख्यिकी एक कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा मंगलवार को जारी अगस्त की एफपीआर रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीण इलाकों में भी ऐसा रोजी-रोजगार की स्थिति में सुधार का रुझान देखा गया , जहाँ 15 साल और उससे ज़्यादा उम्र के लोगों के लिए रोजगार दर जुलाई में 58.0 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 58.2 प्रतिशत हो गयी।
शहरी इलाकों में, रोजगार दर पिछले महीने की तुलना में अगस्त 50.4 प्रतिशत के साथ जुलाई के स्तर पर स्थिर रही। रिपोर्ट के मुताबिक इसी आयु वर्ग में महिलाओं की रोजगार दर अगस्त में 34.8 प्रतिशत दर्ज की गयी जो जुलाई में 34.4 प्रतिशत थी। इसमें मुख्य रूप से ग्रामीण महिलाओं की रोजगार दर में बढ़ोतरी का योगदान रहा, जो पिछले जुलाई के 38.8 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 39.4 प्रतिशत हो गयी। इसी समय के दौरान, शहरी इलाकों में महिलाओं की रोजगार दर मोटे तौर पर 25.4 प्रतिशत के स्तर पर स्थिर रही। जुलाई यह 25.3 प्रतिशत था।
पिछले साल अगस्त की तुलना में कुल मिला कर महिलाओं की रोजगार दर प्रतिशत 1.1 अंक बढ़कर 33.7 प्रतिशत की तुलना में 34.8 प्रतिशत हो गया। इसी समय के दौरान, ग्रामीण इलाकों में महिलाओं का रोजगार दर प्रति सैकड़ा 2.0 अंक सुधर कर 37.4 प्रतिशत से 39.4 प्रतिशत पर पहुंच गयी जबकि शहरी महिलाओं में यह 0.7 अंक घट कर 26.1 प्रतिशत से 25.4 प्रतिशत पर आ गयी।
देश में कुल श्रमिक आबादी का अनुपात (डब्ल्यूपीआर) अगस्त 2026 में बढ़कर 52.8 प्रतिशत हो गया, जो मार्च, 2026 के बाद सबसे ऊंचा है।
ग्रामीण डब्ल्यूपीआर अगस्त, 2026 में वार्षिक आधार पर प्रति सैकड़ा 1.3 अंक बढ़कर 55.8 प्रतिशत हो गया।
अगस्त में बेरोजगारी दर 5.0 प्रतिशत के साथ के स्तर स्थिर रही। अगस्त में ग्रामीण शहरी बेरोजगारी दर घटकर 4.1 प्रतिशत हो गई, जो जनवरी 2026 के बाद से दर्ज किया गया सबसे निचला स्तर है।
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