शिमला , मार्च 23 -- मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के हाल ही में विधानसभा में पेश किये गये बजट दस्तावेजों के अनुसार, 2026-27 के अंत तक राज्य का कुल संचयी कर्ज 1.12 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। हाल के वर्षों में राज्य के कर्ज में लगातार बढ़ोतरी हुई है।

प्राप्त आंकड़ों के अनुसार यह कर्ज 2023-24 में 85,295 करोड़ रुपये था, जो 2024-25 (संशोधित) में बढ़कर 93,625 करोड़ रुपये हो गया। इसके 2025-26 में 1,03,994 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है, जिसके बाद 2026-27 में यह 1,12,319 करोड़ रुपये के आंकड़े को छू लेगा। यह रुझान सीमित राजस्व वृद्धि के बीच बढ़ते वित्तीय दबाव को दर्शाता है।

वार्षिक उधारी लगातार ऋणों पर निर्भरता को जाहिर कर रही है। राज्य ने 2023-24 में 8,644 करोड़ रुपये और 2024-25 में 8,330 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था, जबकि 2025-26 में 10,369 करोड़ रुपये और 2026-27 में 8,325 करोड़ रुपये की उधारी का अनुमान है।

कर्ज की संरचना में एक स्पष्ट शृंखला उभर कर सामने आती है, जिसमें राज्य अत्यधिक रूप से आंतरिक स्रोतों पर निर्भर है। वर्ष 2024-25 में, हिमाचल प्रदेश ने कुल 26,622 करोड़ रुपये का सार्वजनिक ऋण जुटाया, जिसमें आंतरिक स्रोतों से 24,100 करोड़ रुपये और केंद्र से ऋण के रूप में प्राप्त 2,521 करोड़ रुपये शामिल हैं।

वर्ष के दौरान पुनर्भुगतान 18,168 करोड़ रुपये रहा, जो मुख्य रूप से आंतरिक ऋण के मद में था। वर्ष 2025-26 के लिए बजट अनुमानों में उधारी 13,374 करोड़ रुपये निर्धारित की गयी है, जिसमें 12,209 करोड़ रुपये आंतरिक ऋण से और 1,165 करोड़ रुपये केंद्रीय ऋण से प्राप्त होंगे।

संशोधित अनुमान बहुत अधिक उधारी आवश्यकता का संकेत देते हैं, जो 41,173 करोड़ रुपये है। इसमें से 38,408 करोड़ रुपये आंतरिक ऋण है। इसी वर्ष में पुनर्भुगतान की देनदारियां 32,004 करोड़ रुपये होने का अनुमान है, जो ऋण-अदायगी के भारी बोझ को दर्शाता है। वर्ष 2026-27 की बात करें तो, राज्य ने 11,965 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनायी है, जो लगभग पूरी तरह से आंतरिक उधारी (11,903 करोड़ रुपये) के माध्यम से होगा, जबकि केंद्रीय ऋण से केवल 62 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है।

पुनर्भुगतान 4,840 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। कुल मिलाकर हिमाचल प्रदेश की 90 प्रतिशत से अधिक उधारी अब आंतरिक स्रोतों से आती है, जो केंद्रीय सहायता के बजाय बाजार ऋण और संस्थागत वित्त पर बढ़ती निर्भरता को दर्शाती है।

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