रायपुर , अक्टूबर 25 -- छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों और कर्मचारियों के अटैचमेंट तथा ऑनलाइन हाजिरी व्यवस्था में चल रही विसंगतियों पर अंकुश लगाने की तैयारी की जा रही है। अगले महीने से विभाग का ऑनलाइन उपस्थिति सिस्टम ट्रेजरी से जोड़ने की योजना है। इसके बाद डॉक्टरों से लेकर पैरामेडिकल स्टाफ तक की उपस्थिति और वेतन भुगतान की व्यवस्था एकीकृत हो जाएगी। निर्धारित पदस्थापना स्थल से अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों का वेतन भी कट सकता है।
स्वास्थ्य विभाग से आज मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग में शिक्षा विभाग की तर्ज पर ऑनलाइन हाजिरी की व्यवस्था लागू है, लेकिन इसका सॉफ्टवेयर ट्रेजरी के सिस्टम से जुड़ा नहीं है। इसी तकनीकी खामी के कारण अटैचमेंट पर काम कर रहे डॉक्टरों और कर्मचारियों के वेतन पर प्रभाव नहीं पड़ रहा है। वे अपनी मूल पदस्थापना के बजाय दूसरी जगह काम करते हुए भी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
सिस्टम अपडेट नहीं होने के कारण राज्य के ज्यादातर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) अटैचमेंट की व्यवस्था पूरी तरह समाप्त नहीं कर पा रहे हैं। आला अफसरों के निर्देशों के बावजूद कई स्थानों पर डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को मूल पदस्थापना पर वापस नहीं भेजा गया है।
स्वास्थ्य संचालनालय में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के माध्यम से ऑनलाइन हाजिरी सिस्टम को अपडेट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अगले महीने से इसे ट्रेजरी से जोड़ने की तैयारी है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद कर्मचारियों को उसी संस्थान से अपनी उपस्थिति दर्ज करनी होगी, जहां उनकी मूल पदस्थापना है। दूसरी जगह से लगाई गई हाजिरी मान्य नहीं होगी और गैरहाजिर रहने पर वेतन कटौती की कार्रवाई हो सकेगी।
राजधानी रायपुर में भी अटैचमेंट की स्थिति सामने आई है। यहां तीन डॉक्टर सीएमएचओ कार्यालय में अटैच हैं। इनके अलावा नेत्र सहायक, वार्ड बॉय, स्वीपर और आया बाई जैसे कर्मचारियों से भी उनकी मूल पदस्थापना के बजाय दूसरी जगहों पर काम लिया जा रहा है।
पंडरी अस्पताल में तीन नेत्र सहायक अटैच हैं, जबकि वहां नेत्र सहायकों के पद ही नहीं हैं। अस्पताल में आंखों की जांच और इलाज की सुविधा भी नहीं है, क्योंकि माना में आंखों का अलग अस्पताल खोला गया है। इसके बावजूद इन कर्मचारियों को अब तक रिलीव नहीं किया गया है।
धमतरी, जगदलपुर, महासमुंद और दुर्ग के स्वास्थ्य विभाग में भी डॉक्टरों और तकनीकी स्टाफ को सीएमएचओ कार्यालयों में अटैच किए जाने की जानकारी सामने आई है। राजधानी में गांवों के छोटे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पदस्थ कर्मचारियों को भी दूसरे कार्यालयों में अटैच किया गया है।
इस व्यवस्था का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। अस्पतालों में मरीजों के इलाज के लिए उपलब्ध रहने वाले डॉक्टरों का समय कार्यालयीन कार्यों में खर्च हो रहा है। वहीं वार्ड बॉय, स्वीपर और आया बाई जैसे कर्मचारियों से भी उनके मूल कार्यस्थल के बजाय दूसरे संस्थानों में काम लिया जा रहा है। हालांकि, संबंधित जिलों में ऐसे अटैच डॉक्टरों और कर्मचारियों की संख्या 5-6 तक बताई गई है।
स्वास्थ्य विभाग में अटैचमेंट खत्म करने की घोषणा विधानसभा में पहले ही की जा चुकी है। इसके बावजूद आदेशों का पूरी तरह पालन नहीं होने पर दोबारा निर्देश जारी करने पड़े। संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं ने 22 सितंबर को पत्र जारी कर फरवरी-मार्च 2026 में दिए गए आश्वासनों के पालन का प्रमाण तीन दिन के भीतर उपलब्ध कराने को कहा था। देरी होने पर उसका कारण बताने के निर्देश भी दिए गए थे।
इस आदेश को जारी हुए करीब एक महीना बीत चुका है, लेकिन अटैचमेंट की व्यवस्था अब भी बनी हुई है। इससे विभागीय निर्देशों के क्रियान्वयन पर सवाल उठ रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग में सीएमएचओ कार्यालयों में कर्मचारियों की कमी दूर करने के नाम पर डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को अटैच किया जा रहा है। आरोप है कि कुछ कर्मचारी राजनीतिक पहुंच के आधार पर कार्यालयों में अटैचमेंट करा लेते हैं और सप्ताह में दो दिन की छुट्टी का लाभ उठाते हैं।
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