इस्लामाबाद , सितंबर 09 -- पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि अगर यमन का संघर्ष सऊदी अरब की सीमा में फैलता है, तो सऊदी अरब और तुर्की के साथ त्रिपक्षीय मक्का रक्षा गठबंधन लागू हो सकता है।

श्री आसिफ ने यह बात यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा मंगलवार को सऊदी तेल प्रतिष्ठानों पर किये गये हमलों के बाद कही है जिसमें 73 लोग घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि सात अगस्त को हुए इस समझौते का मकसद सामूहिक प्रतिरोध को मजबूत करना है और यह तीनों देशों को किसी एक सदस्य पर हमले को सभी पर हमला मानने की अनुमति देता है।

पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के अनुसार जब उनसे पूछा गया कि क्या इस्लामी मिलिशिया के हमलों के बाद इस समझौते को लागू किया जा सकता है, तो श्री आसिफ ने कहा कि इसकी शर्तों को लेकर कोई अस्पष्टता नहीं है। उन्होंने कहा, "यह एक संयुक्त रक्षा समझौता है। बिना किसी उकसावे के आक्रामकता या यमन में जो कुछ भी हो रहा है उसका सऊदी अरब में फैलने की स्थिति में निश्चित रूप से यह समझौता लागू हो जायेगा। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए।"उन्होंने कहा, "हम इस समझौते की शर्तों और नियमों से बंधे हैं और ज़रूरत पड़ने पर हम उनका पालन करेंगे।" इस दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या हमलों के बाद पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच कोई बातचीत हुई है, तो श्री आसिफ ने कहा कि उन्हें ऐसी किसी बातचीत की जानकारी नहीं है। हालांकि, उन्होंने कहा कि अगर ज़रूरत पड़ी तो पाकिस्तान जवाब देगा, क्योंकि समझौते के तहत ऐसा करना उनकी ज़िम्मेदारी है। इस समझौते में हमले की स्थिति में संयुक्त रक्षा और सामूहिक मदद का प्रावधान है। यह बताते हुए कि समझौता आक्रामक स्वभाव का नहीं है, उन्होंने कहा, "अगर किसी एक सदस्य देश पर हमला होता है, तो तीनों सदस्य देश उसी तरह जवाब देंगे।"उन्होंने कहा, "यह तीन देशों के बीच का समझौता है... लेकिन अगर यह दो देशों के बीच का समझौता भी होता, तब भी हम जवाब देते।" उन्होंने उम्मीद जतायी कि हालात आखिरकार काबू में आ जायेंगे और शांत हो जायेंगे। उन्होंने हूती विद्रोहियों से कहा कि वे अपने अंदरूनी झगड़े को सऊदी अरब तक फैलाने के नतीजों पर विचार करें। उन्होंने कहा, "उन्हें यह बात ध्यान में रखनी चाहिए। " उन्होंने कहा कि हूती गैर-सरकारी समूह हैं और यमन की सरकार ने उनके हमलों का जवाब दिया है। उन्होंने कहा, "मुस्लिम दुनिया में ईरान के लिए सहानुभूति है। इसमें कोई शक नहीं है, लेकिन मेरा मानना है कि गैर-सरकारी गुटों द्वारा दो देशों के बीच के विवाद का फ़ायदा उठाना उनके अपने लिए ख़तरे का काम है।"पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने कहा कि यह समझौता एक रोक लगाने वाले उपाय के तौर पर काम कर सकता है। उन्होंने कहा कि तीनों देशों को हमले का जवाब हमले से ही देने की ज़रूरत नहीं है, बल्कि उन्होंने अपनी संयुक्त ताक़त का प्रदर्शन किया है। यमन में युद्ध 2014 से चल रहा है और बताया कि रक्षा मंत्री रहते हुए उन्होंने उस साल देश का दौरा किया था।

उन्होंने कहा, "उस समय भी हमने सऊदी अरब की मदद की थी।" उन्होंने कहा कि सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान के पुराने रिश्ते और सऊदी इलाके की पवित्रता का मतलब है कि मुश्किल समय में पाकिस्तान सऊदी अरब के साथ खड़ा रहेगा। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में आए गतिरोध पर श्री आसिफ ने कहा कि उन्हें लगता है कि बातचीत के सभी रास्ते अभी बंद नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा, "मैं यह उम्मीद नहीं छोड़ूंगा कि प्रक्रिया खत्म हो गयी है या सभी दरवाजे बंद हो गये हैं। गतिरोध तो है, लेकिन मैं कहूंगा कि स्थिति उससे बेहतर है।" उन्होंने "अप्रत्यक्ष बातचीत" का ज़िक्र करते हुए कहा कि इस्लामाबाद युद्ध में शामिल दोनों पक्षों के देशों के साथ अपने भाई जैसे रिश्तों को लेकर बहुत सावधानी से चल रहा है।

गौरतलब है कि हूती विद्रोहियों ने मंगलवार को दावा किया कि उन्होंने दक्षिणी सऊदी अरब के चार शहरों पर हमला किया, जिसमें 70 से ज़्यादा लोग घायल हो गये और तेल ठिकानों में आग लग गयी। समूह ने कहा कि उसने आभा, खमीस मुशैत, जाज़ान और नज्रान पर दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिनमें आभा अंतरराष्ट्रीय हवाई , किंग खालिद हवाई अड्डा और सऊदी की सरकारी तेल कंपनी अरामको की सुविधाओं को निशाना बनाया गया।

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