बेंगलुरु , नवंबर 02 -- कर्नाटक के लोक निर्माण मंत्री सतीश जारकीहोली ने कहा है कि यदि केंद्र सरकार चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) बढ़ाती है, तो चीनी मिलें गन्ना किसानों को उनकी उपज के लिए अधिक भुगतान करने को तैयार हैं।
श्री जारकीहोली ने बेलगावी में संवाददाताओं से कहा कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार द्वारा सुवर्ण विधानसौध में बुलाई गई दो बैठकों के दौरान चीनी मिलों ने गन्ने के लिए अधिक भुगतान करने की अपनी सहमति जताई थी। उन्होंने कहा कि चीनी का एमएसपी बढ़ने से मिलों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, जिससे वे किसानों को गन्ने के लिए बेहतर दाम दे सकेंगी। उन्होंने बताया कि मिलों ने यह संदेश दिया कि अगर चीनी का एमएसपी बढ़ाया जाता है, तो वे गन्ने के लिए अधिक दाम देने को तैयार हैं।किसानों और चीनी उद्योग के बीच बढ़ते टकराव के बीच मंत्री के इस बयान ने चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति पर ध्यान केंद्रित किया है। किसान गन्ने के लिए अधिक दाम मांग रहे हैं, जबकि मिलों का कहना है कि चीनी की बिक्री से उन्हें पर्याप्त मुनाफा नहीं मिल रहा है।
श्री जारकीहोली ने कहा कि इस संकट को अकेले सुलझाने में राज्य सरकार की क्षमता सीमित है क्योंकि चीनी की कीमत तय करना और इससे जुड़े कई नियम केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। उन्होंने किसानों की चिंताओं को दूर करने के लिए राज्य और केंद्र सरकार द्वारा मिलकर कदम उठाने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कर्नाटक के अलग-अलग जिलों में गन्ने के भुगतान में अंतर पर कहा कि बेलगावी जिले की मिलें लगभग 3,500 रुपये प्रति टन का भुगतान कर रही हैं, जो राज्य में सबसे अधिक दरों में से एक है, जबकि अन्य जिलों में यह भुगतान काफी कम है। उन्होंने गन्ने की तौल में पारदर्शिता को लेकर भी चिंता जताई और सुझाव दिया कि किसानों को अपनी उपज खुद तौलने की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए चीनी मिलों तक जाने वाली सड़कों पर लगभग हर 10 किलोमीटर की दूरी पर 'वेब्रिज' (तौल केंद्र) लगाए जाने चाहिए।
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