अगरतला , अक्टूबर 30 -- त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने चाय उत्पादकों को बेहतर मूल्य दिलाने, परिवहन लागत कम करने और चाय उद्योग को मजबूत करने के उद्देश्य से राज्य के पहले 'चाय नीलामी केंद्र' का उद्घाटन किया।

इस अवसर को त्रिपुरा के लिए एक ऐतिहासिक दिन बताते हुए डॉ. साहा ने इसका श्रेय सरकार, संबंधित विभागों और अन्य हितधारकों को दिया और इसे 'टीम त्रिपुरा' के प्रयासों का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा की मिट्टी और जलवायु गुणवत्तापूर्ण चाय की पैदावार के लिए बेहद अनुकूल है। इस समय सालाना लगभग 70 से 100 लाख किलोग्राम चाय की पैदावार के साथ त्रिपुरा देश में तीसरे और पूर्वोत्तर में दूसरे पायदान पर है। राज्य के चाय उद्योग में लगभग 54 चाय बागान और 2,000 से 2,800 छोटे चाय उत्पादक शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि 2018 से सरकार बागान के बुनियादी ढांचे में सुधार, श्रमिक कल्याण और बच्चों की शिक्षा तक पहुंच बनाने का काम कर रही है। सरकार कम पैदावार दे रहे बागानों को दोबारा जीवन देकर उन्हें अधिक पैदावार देने वाला बनाने का प्रयास कर रही है। इससे हजारों परिवारों की आय बेहतर होगी और रोजगार के नए अवसर बनेंगे।

गौरतलब है कि अब तक त्रिपुरा की अधिकांश चाय नीलामी के लिए कोलकाता और गुवाहाटी भेजी जाती थी, जिससे लागत बढ़ती थी और भुगतान में देरी होती थी। राज्य में नया केंद्र खुलने से स्थानीय स्तर पर नीलामी की सुविधा मिलेगी। ई-नीलामी व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी, खरीदारों के बीच प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा, बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और स्थानीय बागान सीधे बड़े चाय निर्यातकों व पैकेजिंग कंपनियों से जुड़ सकेंगे।

इससे जांच, गोदामों और अन्य सुविधाओं से परिवहन, भंडारण और नमूना परीक्षण की लागत में बड़ी कटौती होगी। आकलन है कि इस कदम से प्रति किलोग्राम लगभग 3 से 6 रुपये की बचत होगी और बिक्री की प्रक्रिया में लगने वाला समय लगभग 40 प्रतिशत घटकर 44 दिनों से सिमटकर महज 26 दिन रह जाएगा।

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