देहरादून , अक्तूबर 25 -- समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा शनिवार को उत्तर प्रदेश में संवाददाताओं से उत्तराखंड के नागरिकों को घुसपैठिया कहने वाले बयान का तीव्र विरोध, आलोचना और भर्त्सना उत्तराखंड में शुरू हो गई है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह बयान देवभूमि के स्वाभिमान और संघर्ष का अपमान है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव के कथित बयान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि भी है और वीरभूमि भी। इस पावन धरती ने देश को संत, सैनिक और राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित अनेक व्यक्तित्व दिए हैं। ऐसे प्रदेश के लोगों को घुसपैठिया कहना उनके स्वाभिमान और संघर्ष का अपमान है।
श्री धामी ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान हुए रामपुर तिराहा कांड का जिक्र करते हुए समाजवादी पार्टी के तत्कालीन शासनकाल पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, तब अलग उत्तराखंड राज्य की मांग कर रहे आंदोलनकारियों पर मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा में गोलियां चली थीं। उन्होंने प्रश्न किया कि उत्तराखंड के लोग अपने संघर्ष और बलिदान को कैसे भूल सकते हैं।
उन्होंने कांग्रेस को भी घेरते हुए पूछा कि क्या वह अपने राजनीतिक सहयोगी अखिलेश यादव की इस टिप्पणी का समर्थन करती है? क्या उत्तराखंड के लोगों को घुसपैठिया कहना कांग्रेस को स्वीकार है? उन्होंने कांग्रेस से इस मुद्दे पर प्रदेश की जनता के सामने अपना पक्ष स्पष्ट करने की मांग की।
मुख्यमंत्री के अलावा, धर्मपुर क्षेत्र के विधायक और राज्य आंदोलनकारी रहे विनोद चमोली और भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता मथुरादत्त जोशी ने भी अखिलेश यादव के बयान की कड़ी भर्त्सना की।
दूसरी ओर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में शुमार और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अखिलेश यादव की टिप्पणी को दुर्भाग्यजनक बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि टिप्पणी करते समय संभवतः अखिलेश यादव के मानस पटल पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि रही होगी। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव यह भूल गए कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड कभी एक ही राज्य थे। राज्य विभाजन से पहले कुछ दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हुईं, लेकिन बंटवारे के समय सौहार्दपूर्ण वातावरण रहा। उस समय किसी ने नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, अल्मोड़ा, टिहरी और पौड़ी को अपना कर्मक्षेत्र चुना तो किसी ने इलाहाबाद, गोरखपुर, बनारस और लखनऊ में अपना जीवन बसाया। उन्होंने कहा कि विभाजन के समय जो जहां रह गया, वह वहां का निवासी है और उसे वहां समान अधिकार तथा सम्मान मिलना चाहिए।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित