हरिद्वार , जनवरी 24 -- उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से. नि.) ने शनिवार को हरिद्वार स्थित शांतिकुंज में आयोजित अखंड ज्योति शताब्दी समारोह के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह आयोजन मात्र एक समापन नहीं, बल्कि युग परिवर्तन का शुभारंभ है। उन्होंने कहा कि यह चेतना का महाकुंभ व्यक्ति, समाज और राष्ट्र निर्माण की नई यात्रा को गति देने वाला है। यह ऐतिहासिक क्षण सेवा, समर्पण, साधना और प्रज्ञा का ऐसा संदेश देता है, जो संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणास्रोत है।

राज्यपाल ने कहा कि 51 दिवसीय इस अनुष्ठान ने साधना, सेवा और समन्वय का संदेश देकर आत्मिक एवं नैतिक पुनर्निर्माण का संकल्प प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार द्वारा विश्वभर में किए जा रहे सेवा एवं संस्कार के कार्य युग परिवर्तन की दिशा में सशक्त आधार बन चुके हैं। 80 से अधिक देशों में फैला यह आध्यात्मिक आंदोलन हजारों केंद्रों और करोड़ों अनुयायियों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण का संदेश दे रहा है।

उन्होंने शांतिकुंज को केवल आश्रम नहीं, बल्कि युगतीर्थ और आध्यात्मिक प्रयोगशाला बताते हुए कहा कि यहां साधना, प्रशिक्षण और सेवा के माध्यम से श्रेष्ठ मानव का निर्माण किया जाता है। वर्तमान नेतृत्व में गुरुदेव की विचारधारा को समकालीन संदर्भों से जोड़कर आगे बढ़ाया जा रहा है।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि गायत्री परिवार कोई साधारण संस्था नहीं, बल्कि संस्कृति की सरिता, संस्कारों का सागर और अध्यात्म की आलौकिक आभा है। उन्होंने कहा कि अखंड ज्योति साधारण प्रकाश नहीं, बल्कि वह चेतना है जो बुद्धि को विवेक से, कर्म को धर्म से और आत्मा को परमात्मा से जोड़ती है। यह ज्योति निरंतर प्रज्वलित है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पूरा विश्व अशांति और संघर्ष के दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्य और गायत्री परिवार ही विश्व को शांति एवं सद्भाव की दिशा दिखा सकते हैं।

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