अलवर , मई 21 -- वर्तमान दौर में जहां अपने ही अपनों से दूर होते जा रहे हैं, वहीं राजस्थान में अलवर पुलिस ने इंसानियत की ऐसी मिसाल पेश की है जिसने हर किसी का दिल छू लिया।
अलवर के रैणी थाना पुलिस द्वारा शुरू किया गया 'वरिष्ठ जनसंबल कार्यक्रम' अब बुजुर्गों के लिए उम्मीद और सहारे की नयी किरण बनता जा रहा है। पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी के निर्देशन में चलाये जा रहे इस अभियान के तहत बीट कांस्टेबल गांव-गांव जाकर उन बुजुर्गों और अकेले दंपतियों से मिल रहे हैं, जिनका इस दुनिया में कोई सहारा नहीं है। कोई संतान दूर है, तो कोई पूरी तरह अकेला जीवन बिता रहा है। ऐसे में पुलिस अब सिर्फ कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं रही, बल्कि परिवार बनकर इन बुजुर्गों का हाथ थाम रही है।
तस्वीरों में साफ दिखाई दे रहा है कि पुलिसकर्मी मिट्टी की झोपड़ियों में बैठकर बुजुर्ग महिलाओं का हालचाल पूछ रहे हैं, उनकी समस्याएं सुन रहे हैं और उन्हें यह भरोसा दिला रहे हैं कि 'अब आप अकेले नहीं हैं।' यह दृश्य हर संवेदनशील इंसान को भावुक कर देने वाला है। इस पुनीत कार्य में स्थानीय भामाशाहों एवं दानदाताओं का भी सराहनीय सहयोग लिया जा रहा है। इससे पुलिस और जनता के बीच की दूरी कम हो रही है, वहीं सामुदायिक पुलिसिंग को बढ़ावा मिल रहा है।
प्रत्येक रविवार को आवश्यक सामग्रियों की आपूर्ति पुलिस प्रशासन द्वारा इस अभियान के तहत एक निश्चित लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके तहत प्रत्येक सप्ताह में बीट कांस्टेबल द्वारा इन बुजुर्गों के घर जाकर फल, सब्जी, अनाज, आवश्यक खाद्य सामग्री और पानी जैसी बुनियादी सुविधायें उपलब्ध कराई जाएंगी। चिह्नित किये गये इन बुजुर्गों को संबंधित बीट कांस्टेबल द्वारा एक तरह से 'गोद' लिया गया है। कांस्टेबल न केवल नियमित रूप से उनका कुशल-क्षेम पूछेंगे, बल्कि उनके परिवार के सदस्य की भांति उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान भी सुनिश्चित करेंगे।
स्थानीय भामाशाह और समाजसेवी भी इस नेक काम में आगे आ रहे हैं। इससे पुलिस और जनता के बीच भरोसे की डोर और मजबूत हो रही है।
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