जौनपुर , मई 28 -- उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के मछलीशहर पड़ाव स्थित शाही ईदगाह में गुरुवार को ईद-उल-अजहा (बकरीद) की नमाज अकीदत और शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई। शाही ईदगाह के इमाम एवं खतीब हज़रत मौलाना अब्दुज़ ज़ाहिर सिद्दीकी हन्फी ने हजारों नमाजियों को नमाज अदा कराई। खुतबे के दौरान मौलाना अब्दुज़ ज़ाहिर सिद्दीकी ने हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की सुन्नत और कुर्बानी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कुर्बानी की परंपरा अल्लाह के नबी हज़रत इब्राहिम की आज़माइश से जुड़ी है। उन्होंने बताया कि अल्लाह ने उनके सबसे प्रिय पुत्र हज़रत इस्माइल अलैहिस्सलाम की कुर्बानी मांगी थी, जिसे स्वीकार करने की तैयारी के बाद अल्लाह ने उनकी निष्ठा को कबूल कर लिया और बेटे की जगह एक दुम्बे की कुर्बानी कराई। उसी याद में सदियों से बकरीद मनाई जाती है।

उन्होंने कहा कि ईद और ईद-उल-अजहा की नमाज ईदगाह में खुले मैदान में अदा करना सुन्नत है और इससे मुस्लिम समाज की एकजुटता तथा शानो-शौकत का प्रदर्शन होता है।

इमाम ने कहा कि कुर्बानी केवल एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि अल्लाह की राह में अपनी प्रिय चीज कुर्बान करने का जज्बा है। उन्होंने लोगों से हलाल कमाई से खरीदे गए स्वस्थ और बिना किसी शारीरिक दोष वाले जानवरों की ही कुर्बानी करने की अपील की।

उन्होंने बताया कि कुर्बानी के गोश्त के तीन हिस्से किए जाने चाहिए-एक हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों के लिए, दूसरा रिश्तेदारों और पड़ोसियों के लिए तथा तीसरा अपने परिवार के लिए।

मौलाना ने प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील करते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थानों और रास्तों पर कुर्बानी करने से बचें। साथ ही कुर्बानी के बाद अवशेषों को खुले में न फेंककर गड्ढा खोदकर दबाने या नगर पालिका के कचरा वाहनों को सौंपने की सलाह दी।

उन्होंने प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी न करने और कुर्बानी से जुड़े फोटो या वीडियो सोशल मीडिया पर साझा न करने की भी अपील की, ताकि किसी की भावनाएं आहत न हों।

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