चंडीगढ़ , अगस्त 03 -- शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा राज्य सरकार को 15 दिनों के भीतर कर्मचारियों के 14,191 करोड़ रुपये के मंहगाई भत्ता (डीए) बकाया का भुगतान करने के निर्देश का स्वागत किया है।
पार्टी ने आम आदमी पार्टी सरकार पर कर्मचारियों को उनका वैध अधिकार देने से बचने का आरोप लगाते हुए राज्य कर्मचारियों से आगामी विधानसभा चुनाव में शिअद का समर्थन करने की अपील की।
चंडीगढ़ में सोमवार को आयोजित प्रेस वार्ता में वरिष्ठ अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार ने अदालत में कर्मचारियों को डीए का लाभ न देने के लिए विभिन्न तर्क दिये। उन्होंने दावा किया कि सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति ने यह सिफारिश की थी कि राज्य कर्मचारियों को अतिरिक्त डीए देने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि उन्हें पहले से पर्याप्त लाभ मिल रहे हैं। साथ ही राज्य की आर्थिक स्थिति का हवाला देकर भी डीए न देने का पक्ष रखा गया।
श्री मजीठिया ने कहा कि अदालत में सरकार ने आर्थिक संकट का हवाला दिया, जबकि सार्वजनिक मंचों पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत बताते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता के सामने कुछ और तथा अदालत में कुछ और कह रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद सरकार 15 दिनों के भीतर पूरा भुगतान करने की इच्छुक नहीं है और किस्तों में भुगतान की अनुमति के लिए अदालत का रुख किया है।
श्री मजीठिया ने कहा कि एक ओर सरकार कर्मचारियों के बकाया भुगतान से बच रही है, वहीं दूसरी ओर विज्ञापनों, सरकारी आयोजनों और अन्य खर्चों पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किये जा रहे हैं।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए वरिष्ठ अकाली नेता एन.के. शर्मा ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल की सरकारों ने तीसरे, चौथे और पांचवें वेतन आयोग को लागू किया था। उन्होंने दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के कार्यकाल में कर्मचारियों के मंहगाई भत्ते में 125 प्रतिशत तक की वृद्धि की गयी थी।
श्री शर्मा ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल राज्य कर्मचारियों की पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) बहाल करने तथा उनकी अन्य लंबित मांगों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कर्मचारियों से अपील की कि वे आगामी विधानसभा चुनाव में अपने हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लें।
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