अंबिकापुर, जुलाई 29 -- छत्तीसगढ़ की अंबिकापुर कोतवाली पुलिस ने झारखंड में वासेपुर के कुख्यात गैंगस्टर सब्बीर उर्फ साबिर आलम, उसके बेटे कामरान आलम और अन्य साथियों के खिलाफ एक और मामला दर्ज किया है।
पुलिस से बुधवार को मिली जानकारी के अनुसार खरसिया नाका निवासी व्यवसायी अबू मोहम्मद ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में उन्होंने बताया कि कामरान आलम, साबिर आलम और जिसान आलम के साथ विवाद को लेकर उन्होंने पहले भी कोतवाली थाने में दो प्राथमिकी दर्ज कराई थीं।
अबू मोहम्मद का आरोप है कि इन मामलों को वापस लेने के लिए तीन जनवरी, चार जनवरी और 17 मार्च 2026 को कामरान आलम, साबिर आलम, इरशाद आलम, जिसान आलम, दिलशाद आलम, सलमान, मोहम्मद साद, खुशबास और नौसाद (सभी निवासी हबीब नगर) ने अलग-अलग स्थानों पर उन्हें धमकाया और जान से मारने की धमकी दी।
शिकायत के आधार पर कोतवाली पुलिस ने गैंगस्टर सब्बीर आलम, उसके बेटे कामरान और अन्य आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 296(बी), 351(3) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि आरोपियों ने आखिरी बार रास्ते में रोककर धमकी दी, जिसके बाद वह भयभीत है।
बताया जा रहा है कि झारखंड के धनबाद स्थित वासेपुर का कुख्यात गैंगस्टर शब्बीर आलम (60) और उसका सहयोगी जावेद पिछले करीब 13 सालों से अंबिकापुर में छिपकर रह रहे थे। इस दौरान शब्बीर आलम ने यहां करोड़ों रुपए का कारोबार खड़ा कर लिया और शहर में आलीशान मकान भी बनवाया।
दोहरे हत्याकांड के मामले में शब्बीर आलम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है। वर्ष 2013 में हाईकोर्ट में पेशी के दौरान वह फरार हो गया था। इसके बाद धनबाद पुलिस ने उसे भगोड़ा घोषित कर उसकी तलाश शुरू की थी।
एक जुलाई को झारखंड पुलिस की टीम शब्बीर आलम को गिरफ्तार करने अंबिकापुर पहुंची थी, लेकिन आरोप है कि उसके सहयोगियों ने पुलिस की गिरफ्त से उसे छुड़ा लिया। इसके बाद से वह फरार है।
झारखंड पुलिस की शिकायत पर सरगुजा पुलिस ने गैंगस्टर को भगाने के मामले में उसके बेटे कामरान, मोहम्मद जाहिद, उसके बेटे जुनैद खान और अन्य आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। इस मामले में मोहम्मद जाहिद और जुनैद खान को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अन्य आरोपी फरार हैं।
पुलिस ने गैंगस्टर को पनाह देने के आरोप में राजहंस बस संचालक बैदुल खान (57) के खिलाफ भी कोतवाली थाने में मामला दर्ज किया है। आरोप है कि बैदुल खान को जानकारी थी कि शब्बीर आलम भगोड़ा है, इसके बावजूद उसे शरण दी गई।
सरगुजा पुलिस अब शब्बीर आलम के आर्थिक नेटवर्क, संपत्तियों और उससे जुड़े लोगों की जांच कर रही है। बैदुल खान से रिश्तेदारी के कारण राजहंस बस और एम्बुलेंस कारोबार में गैंगस्टर के निवेश की भी जांच की गई है।
हालांकि, राजहंस बस संचालकों ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कारोबार से संबंधित सभी दस्तावेज पुलिस को सौंपे हैं। पुलिस जांच में अभी तक राजहंस बस और एम्बुलेंस कारोबार में शब्बीर आलम के निवेश की पुष्टि नहीं हुई है।
जांच में यह भी सामने आया है कि शब्बीर आलम और उसके बेटे कामरान के शहर के कुछ कारोबारियों से व्यावसायिक संबंध थे। इनमें नीलम बस संचालक भी शामिल हैं। साझेदारी में उन्होंने नवीन बस कंपनी की एक बस खरीदी थी, हालांकि उसका संचालन शुरू नहीं हो सका।
इसके अलावा शब्बीर आलम और कामरान आलम द्वारा जमीन के कारोबार में बड़ी रकम निवेश किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस इन सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
भाजपा पार्षद आलोक दुबे ने कहा कि झारखंड के गैंगस्टर वर्षों तक अंबिकापुर में सुरक्षित तरीके से छिपे रहे और यहां कारोबार भी करते रहे। उन्होंने कहा कि अपराधियों के आर्थिक नेटवर्क की गहन जांच होनी चाहिए।
आलोक दुबे ने इसके लिए एसआईटी या आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो जैसी विशेषज्ञ एजेंसी से जांच कराने की मांग उठाई है।
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