चंडीगढ़ , अक्टूबर 30 -- हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने शुक्रवार को 1857 की क्रांति से जुड़े कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्यों का खुलासा करते हुए कहा कि अंबाला छावनी में मेरठ से करीब नौ घंटे पहले आजादी की पहली लड़ाई शुरू हो गई थी। उन्होंने बताया कि 10 मई 1857 को अंबाला की पांचवीं और 60वीं नेटिव इन्फैंट्री के भारतीय सैनिक सुबह ही हथियार लेकर अपनी बैरकों से बाहर आ गए थे।
ऊर्जा मंत्री के अनुसार, राष्ट्रीय अभिलेखागार से मिले दस्तावेजों में सितंबर 1857 की एक दर्दनाक घटना का उल्लेख है। इसमें अंबाला छावनी के परेड ग्राउंड में पांचवीं और 60वीं नेटिव इन्फैंट्री के 135 भारतीय सैनिकों को महज 10 मिनट में गोलियों से मारने का जिक्र है। इस दौरान 33 सैनिकों को बंदी बनाया गया, जबकि करीब 40 भागने में सफल रहे। उन्होंने बताया कि अंग्रेजों ने विद्रोह के बाद बंगाल आर्मी की 74 सैन्य कंपनियों को भंग कर दिया था।
श्री विज ने गुमनाम शहीदों और क्रांतिकारियों के बलिदान को सम्मान देने के लिए अंबाला छावनी में 22 एकड़ में शहीद स्मारक बनाया गया है। इसका लोकार्पण पांच नवंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे। इस अवसर पर गांधी ग्राउंड में जनसभा भी आयोजित होगी।श्रीउन्होंने बताया कि स्मारक में 22 गैलरियां बनाई गई हैं, जिनके माध्यम से 1857 की क्रांति और देशभर में हुए संघर्ष को आधुनिक तकनीक से प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें करीब 700 शहीदों के नाम, उनके पिता का नाम और गांव का विवरण सुनहरे अक्षरों में अंकित किया जाएगा। स्मारक में राव तुलाराम, रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे सहित अनेक क्रांतिकारियों के योगदान को भी दर्शाया गया है।
श्री विज ने बताया कि स्मारक में 63 मीटर ऊंचा कमल का फूल बनाया गया है। 1857 की क्रांति में कमल और रोटी का इस्तेमाल संदेश पहुंचाने के लिए किया जाता था। क्रांतिकारी इनके माध्यम से एक सैन्य टुकड़ी से दूसरी टुकड़ी तक संपर्क स्थापित करते थे।
उन्होंने कहा कि गुमनाम शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए विशेष गैलरी बनाई गई है, जहां एक साथ करीब 40 लोग श्रद्धांजलि दे सकेंगे। इस दौरान प्रज्वलित होने वाली ज्योति के साथ श्रद्धांजलि देने वाले व्यक्ति का नाम भी दर्ज होगा।
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