नयी दिल्ली , अक्टूबर 08 -- केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने से देश में युवा वैज्ञानिकों और तकनीकी प्रतिभाओं के लिए रोजगार तथा नवाचार के नए अवसर पैदा हुए हैं।

अंतरिक्ष विभाग ने गुरुवार को बताया कि डॉ. जितेंद्र सिंह ने वाराणसी के रुद्राक्ष इंटरनेशनल कोऑपरेशन एंड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित नमो बुक फेस्ट में छात्रों से संवाद करते हुए कहा कि पहले घरेलू अंतरिक्ष क्षेत्र में सीमित अवसरों के कारण कई युवा पेशेवर विदेशों का रुख करते थे। अब अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों और स्टार्टअप के प्रवेश से देश में ही व्यापक अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। उन्होंने स्काईरूट सहित निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप का उल्लेख करते हुए कहा कि ये कंपनियां युवा इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों के लिए नए रास्ते खोल रही हैं।

उन्होंने कहा कि भारत का अंतरिक्ष इकोसिस्टम अब केवल सरकारी संस्थानों तक सीमित नहीं है। "साइलो का युग समाप्त हो गया है", इसलिए सरकार, निजी उद्योग, स्टार्टअप, शिक्षाविदों और अनुसंधान संस्थानों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र को खोलने से यह मुख्य रूप से सरकार के नेतृत्व वाले क्षेत्र से निकलकर एक व्यापक इकोसिस्टम में बदल गया है, जिसमें निजी उद्यम और युवा पेशेवर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

डॉ. सिंह ने कहा कि देश की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था वर्तमान में करीब नौ अरब अमेरिकी डॉलर की है और मौजूदा गति बनी रहने पर अगले 8-10 वर्षों में इसके 45-46 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। उन्होंने कहा कि इस विस्तार में क्षेत्र के उदारीकरण और अंतरिक्ष गतिविधियों में अधिक से अधिक हितधारकों की भागीदारी की महत्वपूर्ण भूमिका है।

उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल अब केवल रॉकेट और अंतरिक्ष अभियानों तक सीमित नहीं है, बल्कि बुनियादी ढांचे की योजना, परियोजनाओं की निगरानी और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में भी इसका उपयोग बढ़ रहा है। भारतीय उपग्रहों से प्राप्त सूचनाएं नेपाल, बांग्लादेश, म्यांमार और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों को बाढ़ तथा अन्य प्राकृतिक आपदाओं की तैयारी में भी मदद कर रही हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पिछले 12-13 वर्ष भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में व्यापक बदलाव के रहे हैं। देश के पास लंबे समय से वैज्ञानिक प्रतिभा और मानव संसाधन मौजूद थे लेकिन हाल के वर्षों में अनुकूल नीतिगत वातावरण तैयार होने से इस क्षमता को राष्ट्रीय शक्ति में बदलने में मदद मिली है। उन्होंने डीप ओशन मिशन, क्वांटम मिशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन जैसी पहलों का उल्लेख किया।

डॉ. सिंह ने जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी को अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कोविड-19 के खिलाफ डीएनए टीके के विकास और जीनोम इंडिया पहल को उन्होंने देश की बढ़ती स्वदेशी वैज्ञानिक क्षमता के उदाहरण के रूप में बताया।

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