नयी दिल्ली , मई 08 -- भारत ने अंतरिक्ष उद्योग के लिए उत्पादों के लिए वैश्विक सहयोग और विशेषज्ञता के साथ विकसित मानकों को मानवता के लिए महत्वपूर्ण बताया है और कहा है कि देश अपने मानकों को अंतर्राष्ट्रीय ढांचे के अनुरूप बनाने के प्रयास कर रहा है।

भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) की मेजबानी में शुक्रवार को राजधानी में अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (आईएसओ) की 'अंतरिक्ष प्रणाली और संचालन' उपसमिति के 35वें पूर्व अधिवेशन और कार्य समूह की बैठकों के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते उपभोक्ता मामले विभाग की सचिव निधि खरे ने मानकों को आगे बढ़ाने में वैश्विक सहयोग के महत्व और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष मानक पारिस्थितिकी तंत्र को आकार देने में भारत की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, '' इस तरह के वैश्विक सहयोग और विशेषज्ञता द्वारा विकसित मानक, मानवता के लिए अंतरिक्ष को सुरक्षित, स्वस्थ और समावेशी बनाने में मदद करेंगे।"भारत ने पहली बार 'अंतरिक्ष प्रणाली और संचालन' पर आईएसओ की अंतरराष्ट्रीय उपसमिति की बैठकों की मेजबानी की है। इस सम्मेलन में 13 देशों के 131 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

उन्होंने कहा, "भारत के लिए इस बैठक की मेजबानी करना अत्यंत गौरव का विषय है, क्योकि हम वैश्विक अंतरिक्ष परिवर्तन के अग्रणी के रूप में खड़े हैं। अंतरिक्ष क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधारों और इस क्षेत्र में गैर सरकारी इकाइयों को प्रोत्साहित और अधिकृत करने वाली स्वायत्त एजेंसी- इन-स्पेस की स्थापना के माध्यम से भारत सरकार ने भारत को एक नये उभरते हुए अंतरिक्ष उद्योग केंद्र के रूप में विकसित करने की की नींव रखी है, जहां स्टार्टअप और स्थापित उद्योग समान रूप से फल-फूल सकते हैं।'भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के महानिदेशक संजय गर्ग ने कहा कि बीआईएस अंतरिक्ष उद्योग की बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए भारतीय मानकों को अंतरराष्ट्रीय ढांचों के अनुरूप बनाने की दिशा में काम कर रहा है। भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के तेजी से होते बदलाव को रेखांकित करते हुए उन्होंने उल्लेख किया कि बीआईएस मानक निजी क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद कर रहे हैं।

इन स्पेस के अध्यक्ष डॉ. पवन गोयनका ने नीतिगत सुधारों और निजी क्षेत्र की भागीदारी से प्रेरित भारत के अंतरिक्ष उद्योग पारिस्थिकी तंत्र के परिवर्तनकारी विकास पर बल दिया। उन्होंने नवाचार को सक्षम करने, उद्योग के विश्वास को बढ़ाने और वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत के एकीकरण को सुविधाजनक बनाने में मजबूत मानकों के महत्व को रेखांकित किया।

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