भीलवाड़ा , जुलाई 29 -- राजस्थान में अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के पीठाधीश्वर रामदयाल जी महाराज ने गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर रामद्वारा में चल रहे भव्य चातुर्मास के दौरान प्रेरणादायक एवं राष्ट्र को गौरवान्वित करने वाला संदेश दिया।

महाराज श्री ने वैदिक और सनातन संस्कृति में गुरु के अद्वैत स्थान को रेखांकित करते हुए कहा कि गुरु ही वह अलौकिक शक्ति है जो शिष्य को अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर (तमसो मा ज्योतिर्गमय) ले जाती है।

उन्होंने जीवन में 'राम कृपा' और 'गुरु कृपा' को ही सच्ची उन्नति का एकमात्र आधार बताया। महाराज श्री ने कहा कि जिस प्रकार आकाश में कई पक्षी उड़ते हैं, लेकिन सर्वोच्च उड़ान गरुड़ की होती है, उसी प्रकार अध्यात्म के जगत में सद्गुरु की कृपा से ही जीव सर्वोच्च शिखर को छूता है। इस पावन अवसर पर उन्होंने संपूर्ण भारतवर्ष के लिए मंगल कामना करते हुए प्रार्थना की कि हमारा समाज, बचपन और यौवन भटकाव से बचे और राष्ट्र आतंकवाद, अज्ञानता और सभी प्रकार की विकृतियों से पूरी तरह मुक्त हो।

रामस्नेही संप्रदाय के इस चातुर्मास में चारों दिशाओं से उमड़ रहा श्रद्धालुओं का सैलाब सनातन धर्म के प्रति अटूट आस्था का प्रमाण है। महाराज श्री ने स्वामी रामचरण महाराज की असीम कृपा का स्मरण करते हुए कहा कि भौतिक संपदा और सोने-चांदी की खदानें भले ही बंद हो सकती हैं, लेकिन आस्था और श्रद्धा की यह दिव्य खदान कभी समाप्त नहीं हो सकती।

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