, March 13 -- कोलंबो, 13 मार्च (वातार) श्रीलंका ने उन 84 ईरानी नाविकों के शवों को उनके वतन भेजने का निर्णय लिया है, जिन्हें हिंद महासागर में अमेरिका ने मार डाला था, जबकि वे युद्ध में भी शामिल नहीं थे।
अमेरिकी पनडुब्बी ने इस महीने की शुरुआत में ईरानी युद्धपोत पर हमला कर डूबा दिया था। यह घटना पश्चिम एशिया में ईरान के खिलाफ इजरायल-अमेरिका के युद्ध शुरू करने के बाद की है।
यह कदम कोलंबो की एक अदालत के उस फैसले के बाद उठाया गया है, जिसमें अधिकारियों को निर्देश दिया गया था कि वे अवशेषों को ईरान वापस भेजने के लिए उनके दूतावास को सौंप दें।
ये नाविक ईरानी युद्धपोत 'आईरिस डेना' पर सवार थे, जिसमें चालक दल के लगभग 180 सदस्य मौजूद थे। यह युद्धपोत चार मार्च को श्रीलंका के तट के पास अमेरिकी हमले का शिकार हुआ था, जिससे यह संघर्ष भारतीय उपमहाद्वीप के जलक्षेत्र के करीब पहुंच गया था।
श्रीलंकाई अधिकारियों ने बताया कि जहाज डूबने के बाद 84 शव बरामद किये गये थे, जबकि 60 नाविक अब भी लापता हैं। चालक दल के 32 सदस्य इस हमले में बच गये और उन्हें श्रीलंका ने अपने यहां शरण दे रखी है।
अवशेषों को गाले के करापिटिया अस्पताल ले जाया गया था, जहाँ पोस्टमॉर्टम किया गया। इसके बाद मजिस्ट्रेट ने शवों को ईरानी अधिकारियों को सौंपने का आदेश जारी किया।
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