मुंबई , अप्रैल 06 -- ामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने गिरफ्तार स्वयंभू बाबा अशोक खरात से जुड़े कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) को सार्वजनिक किया है और इस रिकॉर्ड में खरात की कई राजनेताओं के साथ कथित बातचीत का खुलासा हुआ है। इस विवाद ने महाराष्ट्र में बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है।
सुश्री दमानिया ने इस मामले की विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराने की मांग की है। उधर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने भी मामले के तूल पकड़ने के बाद सोमवार को यह घोषणा कर दी है कि वह स्वयंभू बाबा अशोक खरात से जुड़े सीडीआर मामले की गहन जांच करायेंगे। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि वह प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) अशोक खरात की संपत्ति की भी जांच करेगा।
श्री फड़णवीस ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अनधिकृत व्यक्तियों के लिए सीडीआर तक पहुंच बनाने पर सख्ती से रोक है। उन्होंने कहा, "केवल नामित एजेंसियों को ही ऐसे डाटा एक्सेस का अधिकार है। राज्य सरकार इस बात की जांच करेगी कि यह जानकारी कैसे लीक हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।"उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी। उन्होंने कहा कि संवेदनशील मामलों में केवल आरोप पर्याप्त नहीं हैं और कोई भी कार्रवाई ठोस सबूतों पर आधारित होनी चाहिए। हाल ही में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में सुश्री दमानिया ने विरोधियों, विशेष रूप से शिवसेना (यूबीटी) की नेता सुषमा अंधारे के लगाये आरोपों का खंडन करते हुए आक्रामक रुख अपनाया है।
सुश्री दमानिया ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कोई भेदभाव नहीं किया है और उन सभी राजनीतिक दलों के नेताओं के संपर्क विवरण की जांच की है, जो कथित तौर पर खरात के संपर्क में थे। उन्होंने भाजपा के उन हाई-प्रोफाइल नेताओं (जिनमें देवेंद्र फडणवीस, गिरीश महाजन और मुंडे भाई-बहन शामिल हैं) की सूची पेश की, जिनके नाम कॉल रिकॉर्ड में नहीं थे।
उन्होंने अपने आलोचकों पर निशाना साधते हुए कहा, "हम मुद्दों पर लड़ते हैं, हम बिना दिमाग वाली राजनीति नहीं करते।" सुश्री दमानिया ने जेल में बंद ढोंगी बाबा और राजनेताओं के बीच बातचीत की संख्या को लेकर कई सनसनीखेज दावे किये हैं।
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