मुंबई , सितंबर 02 -- सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने महाराष्ट्र की मतदाता सूची से दो करोड़ से अधिक नाम हटाये जाने पर गहरी चिंता जताते हुए आरोप लगाया कि लगभग 21 प्रतिशत मतदाताओं के नाम साफ कर दिये गये हैं।

सुश्री दमानिया ने अपने बयान में सवाल उठाया कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से कैसे गायब हो सकता है। उन्होंने इसे महज एक प्रशासनिक चूक के बजाय लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में हर पांचवां मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि पुणे, ठाणे और मुंबई उपनगरीय जैसे जिलों में यह कटौती विशेष रूप से अधिक है, जहां श्रमिकों, प्रवासियों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की बड़ी आबादी रहती है।

उन्होंने नाम हटाने के लिए दिये जा रहे कारणों पर सवाल उठाये, जिनमें मौत, पलायन और दोहरे पंजीकरण की बातें कही जा रही हैं। उन्होंने उस प्रक्रिया पर भी चिंता व्यक्त की, जिसके तहत निर्धारित अवधि के भीतर गणना फॉर्म जमा न कर पाने वाले मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हट सकते हैं। उन्होंने कहा कि आपत्ति दर्ज कराने का सुलभ और पारदर्शी अवसर दिये बिना किसी नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटाना मताधिकार की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

सुश्री दमानिया ने चुनाव आयोग से हटाये गये मतदाताओं की पूरी सूची तुरंत सार्वजनिक करने और इस पूरी कवायद की स्वतंत्र एवं पारदर्शी जांच कराने की मांग की। उन्होंने आपत्ति दर्ज कराने की अंतिम तिथि बढ़ाने की भी मांग की और अधिकारियों से प्रक्रिया को सरल बनाने का आग्रह किया, ताकि वास्तविक मतदाता बिना किसी अनावश्यक परेशानी के अपना नाम दोबारा जुड़वा सकें।

लोकतंत्र में मताधिकार के महत्व पर जोर देते हुए सुश्री दमानिया ने कहा कि मतदान के अधिकार को नागरिकों पर कोई अहसान या रियायत नहीं माना जा सकता। उन्होंने जोर दिया कि नाम हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी, जवाबदेह और उचित सुरक्षात्मक उपायों के साथ होनी चाहिए।

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