नैनीताल , जून 30 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में निचली अदालत से आजीवन कारावास की सजा पाए मुख्य आरोपी पुलकित आर्य और सौरभ भास्कर की अपील एवं जमानत प्रार्थना पत्रों पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए फिलहाल कोई राहत नहीं दी और अगली सुनवाई के लिए 20 जुलाई की तिथि निर्धारित की है।

न्यायमूर्ति रवीन्द्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ शाह की खंडपीठ में इन मामलों में सुनवाई हुई। आरोपियों की ओर से दलील दी गई कि अंकिता भंडारी ने आत्महत्या की थी और इस मामले में उनका कोई हाथ नहीं है। उन्होंने अदालत से जमानत पर रिहा किए जाने की मांग की।

दूसरी ओर राज्य सरकार और पीड़ित पक्ष की ओर से विरोध करते हुए कहा गया कि घटना के बाद साक्ष्य छिपाने के लिए रिसॉर्ट के संबद्ध कमरे को बुलडोजर से तोड़ा गया तथा आगजनी की गई। यही नहीं व्हट्सएप चैट सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी आरोपियों के खिलाफ हैं। अन्य पक्षकारों की ओर से भी जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि यदि आरोपियों का घटना से कोई संबंध नहीं था तो साक्ष्य नष्ट करने की कोशिश क्यों की गई।

उल्लेखनीय है कि कोटद्वार की अपर जिला एवं सत्र अदालत ने 30 मई 2025 को पुलकित आर्या, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 354-ए और 201 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले को चुनौती देते हुए आरोपियों ने उच्च न्यायालय में अपील दायर की है।

उल्लेखनीय है कि ऋषिकेश के पास वनतंरा रिसार्ट में रिसेप्शनिस्ट के पद पर तैनात अंकिता भंडारी की सितंबर 2022 में की हत्या कर दी गई थी। उसका शव चीला बैराज से मिला था। तभी से आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।

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