नई दिल्ली, सितम्बर 28 -- रणविजय सिंह, नई दिल्ली दिल्ली में हर एक हजार में से 25 से 26 लोग प्रति वर्ष कुत्तों के शिकार बन रहे हैं। झुग्गी झोपड़ी कॉलोनी हो या पुनर्वासित, अनधिकृत या नियोजित कॉलोनी, हर जगह कुत्तों का आतंक है। तीन चौथाई (75.5 प्रतिशत) लोग सड़कों और गलियों में घूमने वाले लावारिस कुत्ते और एक चौथाई लोगों को पालतू कुत्ते अपना निशाना बनाते हैं। शोध में पाया गया कि दिल्ली में कुत्तों के काटने की घटनाएं राष्ट्रीय औसत से अधिक होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की मदद से वर्ष 2022-23 में हुए एक राष्ट्रीय सर्वे में देश में एक हजार की आबादी में कुत्तों के काटने की दर 17 पाई गई थी, जबकि दिल्ली में हुए इस नए अध्ययन में यहां एक हजार की आबादी में प्रति वर्ष कुत्तों के काटने की घटनाओं की दर 25.5 पाई गई। इस आधार पर गणना करें तो दिल्ली की आबादी क...