नई दिल्ली, फरवरी 28 -- घर में मंदिर या पूजा स्थान हिंदू परिवार का सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। यह वह स्थान है जहां रोजाना भगवान की आराधना की जाती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। वास्तु शास्त्र में मंदिर के स्थान, दिशा, मूर्ति की संख्या, आकार और अन्य नियमों का बहुत विस्तार से वर्णन है। इन नियमों का पालन करने से घर में सुख-शांति, समृद्धि और स्वास्थ्य बना रहता है। आइए विस्तार से जानते हैं वास्तु के अनुसार घर में मंदिर और पूजा स्थान से जुड़े जरूरी नियम।मंदिर या पूजा स्थान की सही दिशा वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में मंदिर या पूजा स्थान हमेशा ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में बनाना चाहिए। यह दिशा सबसे शुभ और पवित्र मानी जाती है। ईशान कोण में पूजा स्थान बनाने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और घर में शांति बनी रहती है। ...