वाराणसी, अक्टूबर 14 -- Varanasi News: वाराणसी, संवाद। यूपी कॉलेज में हिन्दी विभाग की ओर से प्रसिद्ध आलोचक डॉ. नामवर सिंह की जन्मशती पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के प्रथम सत्र में उनके काव्य चिंतन और आलोचना दृष्टि पर चर्चा हुई। 'डॉ. नामवर सिंह : हिंदी आलोचना का संवादी स्वर' विषयक संगोष्ठी के पहले सत्र का शीर्षक 'डॉ. नामवर सिंह : काव्य चिंतन की अंतर्ध्वनियां' रहा। अध्यक्षता करते हुए कवि-आलोचक प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल ने कहा कि नामवर सिंह को उनकी परंपरा और उसकी गहरी समझ ने बनाया। उन्हें समझने के लिए उनके परिवेश को जानना जरूरी है। वह ज्ञानोन्मुखी परंपरा से जुड़कर आलोचना के सर्वोच्च शिखर तक पहुंचे। प्रो. अरविंद त्रिपाठी ने कहा कि नामवर सिंह की आलोचना का क्षेत्र विशाल गंगा के पाट की तरह है। कविता की खोज करते-करते ही वह आलोचक बने। यदि वह कवि नह...