वाराणसी, जुलाई 31 -- Varanasi News: वाराणसी। परिवारों के विघटन, दाम्पत्य जीवन में बढ़ते तनाव और सामाजिक असंतोष का प्रमुख कारण लोभ, अहंकार तथा संवादहीनता है। केवल महिलाओं को दोषी ठहराना उचित नहीं। पति, परिवार और समाज सभी को आत्मचिंतन करने की आवश्यकता है। ये बातें श्रीसर्वेश्वरी समूह के अध्यक्ष बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम कहीं। वह गुरुपूर्णिमा के पर आयोजित तीन दिवसीय महोत्सव के अंतिम दिन शुक्रवार को सायंकालीन महिला एवं युवा संयुक्त सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वास्तविक धन, संपत्ति नहीं, बल्कि अच्छे कर्म, श्रेष्ठ संस्कार और महापुरुषों द्वारा दिखाया गया मार्ग है। मोह-माया का त्याग करने का अर्थ घर-परिवार छोड़ना नहीं, बल्कि मन के विकारों-लोभ, क्रोध, अहंकार, ईर्ष्या और द्वेष का परित्याग करना है। विवाह के बाद बेटी अपना घर-परिवार छोड...