वाराणसी, अक्टूबर 10 -- Varanasi News: वाराणसी। पूर्व केंद्रीय शिक्षामंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि परंपराएं सिर्फ पुस्तकों में संजोने की बात नहीं। इन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी हमारी जिम्मेदारी है। बीएचयू एमएमवी के हिंदी विभाग की तरफ से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी 'मध्यकालीन हिंदी साहित्य और प्रदर्शनकारी कलाएं : परंपरा और निरंतरता' को शुक्रवार को वह मुख्य अतिथि थे। संगोष्ठी में प्रो. उर्वशी गहलोत की पुस्तक 'रीतिकाव्य रंजनी' का विमोचन भी किया गया। उद्घाटन सत्र में डॉ. निशंक ने कहा कि मध्यकालीन हिंदी साहित्य को केवल एक कालखंड के रूप में नहीं देखा जा सकता। कबीर और तुलसीदास जैसे संत कवियों की रचनाएं आज भी प्रासंगिक हैं, क्योंकि इसमें भक्ति, लोकजीवन, आध्यात्मिकता, सामाजिक चेतना और मानवीय संवेदनाओं का व्यापक समावेश है। उन्हों...