वाराणसी, अगस्त 19 -- Varanasi News: वाराणसी। जीवन में कभी विपत्ति आए तो निराश नहीं होना चाहिए। विपदा को भी ईश्वर के रूप में देखें, विपत्ति को भगवत प्राप्ति का मार्ग बना लें। ऐसा करने पर बड़ी से बड़ी विपदा भी संपदा बन जाती है। ये बातें पं.श्रीकांत शर्मा 'बालव्यास' ने बुधवार को कहीं। वह महमूरगंज स्थित शुभम लॉन में हो रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन प्रवचन कर रहे थे। श्रीकाशी सत्संग सेवा समिति की ओर से आयोजित कथा में भक्ति की महिमा का बखान करते हुए बालव्यास ने कहा कि भक्ति ऐसी करें कि जब हम घर में पूजा कर रहे हों तो बाहर स्वयं ठाकुरजी दरवाजा खटखटा रहे हों। ऐसी ही भक्ति विदुर और विदुरानी की रही। उनकी भक्ति से भगवान उनके झोपड़े तक खींचे चले आए。

भगवान की भक्ति का महत्व उन्होंने कहा कि दुनिया भगवान को ढूंढ़ती है लेकिन भगवान अपने भक्तों को याद कर...