वाराणसी, अक्टूबर 11 -- Varanasi News: वाराणसी, संवाद। शिवपुर की रामलीला में अभिनय और संवादों के साथ मृदंग की थाप भी विशेष पहचान रखती है। इस परंपरा को सेठ परिवार तीन पीढ़ियों से निभा रहा है। परिवार के लिए मृदंग वादन रामभक्ति और सेवा का माध्यम है। इस परंपरा की शुरुआत पन्नालाल सेठ ने की थी। उनके बाद पुत्र मोहन लाल सेठ ने परंपरा को आगे बढ़ाया। यह परंपरा अब तीसरी पीढ़ी के दीनानाथ सेठ तक पहुंची है। वह पूरी श्रद्धा के साथ मृदंग वादन की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। रामलीला के विभिन्न प्रसंगों में मृदंग की थाप कलाकारों के अभिनय और संवादों को जीवंत बनाती है।उइसकी यह भी पढ़ें- Chitrakoot News: मनु-सतरुपा की तपस्या और राम-रावण जन्म की लीला का मंचन लय से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है। दर्शक रामकथा से भावनात्मक रूप से जुड़ जाते हैं। सेठ परिवार का समर्पण ...