वाराणसी, अक्टूबर 18 -- Varanasi News: रामनगर, संवाददाता। कहते हैं, जब विपत्ति आती है तो मति पहले मर जाती है। रावण के साथ भी यही हुआ। अहंकार के दानव ने उसको आकंठ घेर लिया। वह प्रभु श्रीराम से ही बैर ले बैठा। मंदोदरी, विभीषण और यहां तक कि कुंभकरण ने भी समझाया लेकिन विनाशकाले विपरीत बुद्धि, सब कुछ खो बैठा रावण। भाई-बंधु, कुटुंब, रिश्तेदार, नातेदार सभी को। मेघनाद के भी काल की भेंट चढ़ने की जानकारी मिली तो वह मूर्छित हो गया। रामलीला के 23वें दिन रावण के दूत बताते हैं कि लक्ष्मण की मूर्छा दूर हो गई है। अपनी सेना की पराजय देख रावण अनेक प्रकार के उपाय से अपने भाई कुंभकरण को नींद से जगाता है। यह भी पढ़ें- Bijnor News: खबर कर दो रघुनंदन को खड़ा हूं दर पे दर्शन को.... कुंभकरण रावण की उदासी का कारण पूछता है तो रावण सारी कहानी बताता है। तब कुम्भकरण भी उ...