वाराणसी, अक्टूबर 17 -- Varanasi News: रामनगर (रामनगर), संवाददाता। रावण पूरी तरह अंहकार में डूबा हुआ था। इतना अहंकार कि पत्नी का कहा भी नहीं माना। भाई ने मना किया तो लंका से ही निकाल दिया। युद्ध टालने का श्रीराम का आखिरी प्रयास भी जब असफल रहा तो एक ही विकल्प बचा था, वह था युद्ध। तो शुरू हो ही गया। वह युद्ध जो धर्म की अधर्म पर श्रेष्ठता और सत्य की असत्य पर विजय के लिए लड़ा जाना था। रामलीला के 22वें दिन शुक्रवार को श्रीराम लंका के चारों द्वारों को घेरने के लिए जामवंत को रणनीति बनाने को कहते हैं। जामवंत नील को पूर्वी द्वार, अंगद को दक्षिणी द्वार, हनुमान को उत्तरी तथा श्रीराम-लक्ष्मण को मध्य में लड़ने की रणनीति बनाते हैं। राम की सेना लंका के चारो द्वार घेर लेती है। यह देख रावण कहता है कि सभी काल की प्रेरणा से यहां आए हैं। दोनों सेनाओं में युद्ध ...