Varanasi News: यादों में ही जिंदा है अब 'छोटे गुरु-बड़े गुरु' की टेर
वाराणसी, अगस्त 17 -- Varanasi News: वाराणसी, मुख्य संवाददाता। काशी यानी बनारस अपनी गलियों में परंपराओं और संस्कृति की सतरंगी छटा बिखेरता है। यहां हर कोने में इतिहास की सैर होती है, हर गली में कोई न कोई कहानी गूंजती है। समय के साथ कुछ रंग फीके पड़ने लगे हैं। कुछ परंपराएं धीरे-धीरे गलियों से गायब हो रही हैं। ऐसा ही कुछ देखने को मिला नागपंचमी पर्व के साथ भी। यह भी पढ़ें- Nag Panchami Wishes 2026: नाग पंचमी पर फोटो के साथ लगाएं ये 15 शानदार कैप्शन, यहां से करें कॉपीनागपंचमी पर्व की घटती रौनक कभी नागपंचमी पर्व जैसे ही नजदीक आता, बनारस की गलियां छोटे-छोटे बच्चों की चहल-पहल से गुलजार हो उठतीं। 'छोटे गुरु का, बड़े गुरु का नाग लो' की पुकार हर गली-मोहल्ले में गूंजती थी। बच्चे हाथों में नाग देवता की तस्वीरें लिए घर-घर जाकर बेचते। साथ में दूध और लावा...
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