वाराणसी, सितम्बर 25 -- Varanasi News: वाराणसी, मुख्य संवाददाता। गोस्वामी तुलसी दास ने एक श्रीराम चरित मानस का सृजन किया। उस एक सृजन ने बाद के पांच सौ वर्षों में मानस ने अनेक तुलसियों का सृजन किया। संत तुलसीदास के बाद काशी के भदैनी मोहल्ले में ही मानस कृपा से जिस तुलसी का उद्भव हुआ उसका नाम डॉ.श्रीनाथ मिश्र था। आज उनकी काया हमारे बीच नहीं किंतु रामकथा गायक के रूप में उन्होंने जो यश अर्जित किया है वह यशकाया सदैव-सदैव इस धराधाम पर विद्यमान रहेगी। ये बातें ख्यात कथावाचक मोरारी बापू ने कहीं। वह मानस मर्मज्ञ डॉ.श्रीनाथ मिश्र के जन्मशती समारोह में गुरुवार को बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे।

समारोह का आयोजन अस्सी स्थित गोयनका विद्यालय के सभागार में आयोजित समारोह में मोरारी बापू ने कहा कि परंपरा वही उचित होती है जो प्रवाही हो, पवित्र हो और परोपकारी भ...